बिहार सरकार और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी केके पाठक से टकराव के कारण निलंबित शिक्षक और चर्चित शिक्षक नेता वंशीधर बृजवासी ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र उपचुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन किया। उन्होंने हजारों समर्थकों के साथ हाथों में तिरंगा झंडा लेकर जुलूस निकाला। अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए वंशीधर ने शिक्षकों और स्नातकों के अधिकारों की लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बताया।
सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
वंशीधर बृजवासी ने मौजूदा और पूर्व सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सभी ने शिक्षकों और स्नातकों को केवल वादों से ठगा है। उन्होंने पटना में शिक्षकों पर लाठीचार्ज, पानी की बौछार और अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षकों को उनका हक दिलाने के बजाय दमन की राजनीति की है। शिक्षकों को न आईकार्ड मिला, न उनके अधिकारों की रक्षा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी उम्मीदवारी शिक्षकों और स्नातकों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए है।
नामांकन के बाद शहीद स्मारक पर किया माल्यार्पण
नामांकन दाखिल करने के बाद वंशीधर बृजवासी ने समर्थकों के साथ जुलूस निकालकर शहीद स्मारक पर पहुंचकर खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक मैं चुनाव नहीं जीतूंगा, शिक्षकों और स्नातकों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा।
शिक्षकों के साथ हैं मेरा बल
वंशीधर ने दावा किया कि उनके साथ 60,000 से अधिक शिक्षक हैं, जो उनके समर्थन में मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक मेरे साथ हैं। यह चुनाव केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक समुदाय की आवाज है। वंशीधर बृजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया है। उनकी उम्मीदवारी ने तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है।
चुनावी मैदान में बढ़ी सरगर्मी
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए के अभिषेक झा, महागठबंधन के गोपी किशन, जन सुराज के डॉ. विनायक गौतम समेत कई अन्य प्रत्याशी पहले ही मैदान में हैं। वंशीधर बृजवासी के उतरने से चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है।
वंशीधर का संकल्प
वंशीधर बृजवासी ने चुनाव जीतने पर शिक्षकों और स्नातकों के अधिकारों की रक्षा, सरकारी वादों को लागू करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल सत्ता पाने की नहीं, बल्कि एक नई व्यवस्था बनाने की है।