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Bihar : मनरेगा में मनमानी! दूसरे प्रखंड में रह रहे रिश्तेदारों को जॉब कार्ड, 'अमर उजाला' की ग्राउंड रिपोर्ट

Mon, 09 Feb 2026 08:24 AM IST
तिरहुत ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी

सार

Amar Ujala Exclusive : सरकार 100 की जगह 125 दिन काम देगी इन्हें! मनरेगा का नाम बदल कर जी राम जी करने से क्या बदल जाएगा भ्रष्टाचार का खेल? एक ग्राम पंचायत का भ्रष्टाचार बता रहा, कितना बड़ा हो सकता है मामला।
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मुखिया के इन दो भाइयों के नाम से भी मनरेगा में काम दिखाया गया। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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विकसित भारत 2047 के लिए भारत सरकार जी-राम-जी लेकर आई है, जो मनरेगा का स्थान लेगा। यह प्रति ग्रामीण परिवार रोजगार गारंटी बढ़ाकर 125 दिन कर देगा। मतलब, ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी। लेकिन, क्या आपको अंदाजा है कि फिलहाल मनरेगा में कैसे-किसकी आय बढ़ रही है? अगर नहीं तो बिल्कुल अंतिम छोर की पड़ताल करती यह रिपोर्ट पढ़ें। ऐसी रिपोर्ट, जिसमें मनरेगा के तहत हो रहे काम और इसमें काम करने वालों की पड़ताल है। घोर आश्चर्य कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के दावे करने वाली सरकारों के सिस्टम में यह सब इतनी आसानी से हो रहा है।

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फायदों को समझने की कोशिश में हाथ लगा यह खेल!
दिसंबर में केंद्र सरकार जी-राम-जी लेकर आई तो मनरेगा के नाम पर खूब बहस हुई। ऐसे में 'अमर उजाला' ने बिहार के सीमावर्ती जिलों में मनरेगा के काम और इसके कामगारों को मिल रहे फायदों को समझने की कोशिश की। इस कोशिश में हमें कुछ-न-कुछ कई जगह मिला। लेकिन, एक जगह कागजों की पड़ताल में जो बातें दिखीं, वह सचमुच पूरे सिस्टम का पोल खोल रही है। यह जगह है पूर्वी चंपारण। नेपाल से सटा बिहार का उत्तर पश्चिम का जिला। प्रमंडल- तिरहुत। 12 विधायक देने वाला पूर्वी चंपारण। इसी के ढाका विधानसभा क्षेत्र से यह खबर निकली। 

पूर्वी चंपारण के घोड़ासन के एक पंचायत से ग्राउंड रिपोर्ट
खबर में आगे बढ़ने से पहले एक बार फिर ऊपर दी गई तस्वीर के दोनों युवकों को देखें। यकीन कीजिए, यह मनरेगा के मजदूर हैं। मजदूरों को ऐसे कपड़ा पहनने का हक नहीं, हम यह नहीं कह रहे। लेकिन, यह तो पक्का है कि ऐसी वेशभूषा और साधन-संपन्न लोगों को मनरेगा मजदूर के रूप में कागज पर देखना चौंकाता है। यह पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन प्रखंड क्षेत्र के बिजई पंचायत में मामला सामने आया। जब तक हम इसकी पड़ताल करते पहुंचे, इनके खिलाफ शिकायत कागजों का पुलिंदा बनकर जिला मुख्यालय पहुंच चुकी थी। फिर भी कागजातों को जुटाने में मुश्किल हुई, क्योंकि मामला एक मुखिया के 'अपनों' का था। तस्वीर में दिख रहे दोनों युवक बिजई पंचायत की मुखिया सविता देवी के भाई सत्यानंदन कुमार (25) और श्यामनंदन कुमार (22) हैं। इनके पिता का नाम भागीरथ प्रसाद है। 
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मुखिया के मायके से सभी सदस्य मनरेगा मजदूर
एक और, अभिनंदन कुमार (24) का भी नाम सामने आता है, लेकिन मनरेगा कार्ड संबंधित कागजात इस नाम से नहीं मिलता है। सत्यानंदन कुमार (25) और श्यामनंदन कुमार (22) के मनरेगा जॉब कार्ड और उन्हें दिए काम का प्रमाण नीचे देखने के पहले यह जानना भी रोचक है कि बिजई पंचायत की मुखिया सविता देवी ने मनरेगा योजना में अपने पंचायत के मजदूरों के साथ दूसरे प्रखंड में रहने वाले मायके के रिश्तेदारों को दिया। मजदूरी करने वालों की सूची में उनकी मां, पिताजी, दो भाई, बहन और मायके गांव के कई लोग शामिल हैं। जिला मुख्यालय पहुंचे कागजातों की मानें तो मुखिया ने अन्य जिले के मजदूरों के नाम पर भी जॉब कार्ड और काम जारी किया। क्या आधार और क्या वोटर कार्ड! क्या पहचान की जांच और क्या काम की सच्चाई!

(अगली कड़ी में पढ़ें- बगैर काम के भुगतान, सरकारी समाधान भी अजूबा)
इनपुट : राजीव रंजन, मोतिहारी

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