प्रशांत किशोर (पीके) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस इच्छाशक्ति के साथ जनता ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया था, उस पर वे खरा नहीं उतर सके हैं। बिहार में पहले अपराधियों का जंगलराज था, लेकिन अब यह अधिकारियों के जंगलराज में तब्दील हो गया है। पीके ने दावा किया कि नीतीश कुमार की प्रशासनिक क्षमता समाप्त हो चुकी है और अब बिहार में बदलाव की बयार बह रही है। उन्होंने बीजेपी, आरजेडी और जेडीयू को एक ही थाली के चट्टे-बट्टे बताते हुए कहा कि सत्ता के लिए ये दल बार-बार गठबंधन बदलते रहते हैं।
जन सुराज अकेले लड़ेगा चुनाव
मुजफ्फरपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 'जन सुराज' किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में कई दलों के नेताओं का मोहभंग हो रहा है और लोग उनके दल में शामिल हो रहे हैं। जनता से मिल रहे फीडबैक के आधार पर साफ है कि लोग नीतीश कुमार को हटाने के पक्ष में हैं। पीके ने ऐलान किया कि 'जन सुराज' बिहार की सभी 243 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगा।
नीतीश की वापसी का सुझाव मैंने ही दिया था, राजद को हुआ फायदा
प्रशांत किशोर ने खुलासा किया कि जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर जीतन राम मांझी को सत्ता सौंपी थी, तब वे उनसे दिल्ली में मिले थे। पीके के अनुसार, उन्होंने ही नीतीश को सत्ता में वापसी करने और बिहार को फिर से नेतृत्व देने की सलाह दी थी। उस समय उनका गठबंधन राजद के साथ था, जिससे लालू प्रसाद यादव की पार्टी को भी बड़ा फायदा मिला। हालांकि, अब वे वही नेता नहीं रहे जो कभी सुशासन के लिए जाने जाते थे।
जनता नीतीश से नाराज़, मुख्यमंत्री गद्दी छोड़ने को तैयार नहीं
प्रशांत किशोर ने कहा कि शुरूआती दिनों में नीतीश कुमार ने बिहार में सुशासन की नींव रखी थी, लेकिन अब वे पूरी तरह सत्ता के लोभ में डूब चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की जनता अब उनसे पूरी तरह मोहभंग हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वे गद्दी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में नीतीश कुमार के खिलाफ माहौल बन चुका है और लोग तेजी से 'जन सुराज' से जुड़ रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में इस बदलाव का असर साफ दिखाई देगा।