बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान जिस बंद चकिया चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की घोषणा की गई, उसी मिल की जमीन बिक्री का मामला सामने आने के बाद पूर्वी चंपारण से पटना तक हलचल तेज हो गई है। इस प्रकरण को ‘अमर उजाला’ ने उजागर किया था, जिसके बाद सरकार और प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चकिया चीनी मिल का पुराना इतिहास
मोतिहारी के बारा चकिया में वर्ष 1995 तक चंपारण शुगर मिल के नाम से चीनी मिल संचालित थी, जो बाद में दिवालिया हो गई। वर्ष 2008 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर नीलामी हुई, जिसमें मोतिहारी निवासी विष्णुकांत गुप्ता ने मिल को खरीदा। हालांकि नीलामी केवल कबाड़ तक सीमित थी या जमीन सहित पूरे मिल की, इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं, जिसकी पुष्टि ‘अमर उजाला’ नहीं करता।
भू-हदबंदी आदेश और जमीन बिक्री
चकिया चीनी मिल से जुड़ा भू-हदबंदी वाद पहले संख्या टीआर 115/82-83 के रूप में शुरू हुआ, जो बाद में भू-हदबंदी वाद संख्या 1/2018 बना। इस वाद में मोतिहारी के वर्तमान जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल द्वारा करीब 60 एकड़ जमीन को रोक सूची से मुक्त किए जाने के बाद चीनी मिल की जमीन की बिक्री शुरू हो गई।
मुख्यमंत्री की घोषणा से किसानों में जगी उम्मीद
17 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के दौरान मोतिहारी पहुंचे और मंच से बंद पड़ी चकिया चीनी मिल को फिर से चालू करने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद इलाके के गन्ना किसानों में खुशी और नई उम्मीद देखने को मिली।
गन्ना उद्योग मंत्री की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत में गन्ना उद्योग मंत्री संजय पासवान ने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में बंद चीनी मिलों को चालू करने का प्रस्ताव लाया गया था। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जिसकी लगातार बैठकें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस विषय को लेकर गंभीर हैं और बेरोजगारी व पलायन रोकना सरकार की प्राथमिकता है। चकिया चीनी मिल की जमीन बिक्री को लेकर मंत्री ने कहा कि मोतिहारी डीएम से जानकारी ली जाएगी और यह पूछा जाएगा कि जमीन बेचने का आदेश किस आधार पर जारी किया गया।
चार विधायकों का संयुक्त पत्र
चीनी मिल की जमीन बिक्री रोकने को लेकर मोतिहारी के चार विधायकों ने भी पहल की है। पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव के लेटर पैड पर कल्याणपुर विधायक सचिन्द्र सिंह, हरसिद्धि विधायक व पूर्व गन्ना मंत्री कृष्णनंदन पासवान और मोतिहारी विधायक प्रमोद कुमार ने संयुक्त रूप से उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में भू-हदबंदी वाद संख्या 1/2008 में पारित आदेश को निरस्त करने और सरकार के हस्तक्षेप से बंद चकिया चीनी मिल को चालू कराने की मांग की गई है।
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विधायकों के पत्र में लगाए गए आरोप
संयुक्त पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2008 में नीलामी के बाद चीनी मिल का कबाड़ बेचकर राशि राजकीय कोष में जमा कर संचालन किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पत्र में आरोप लगाया गया है कि चीनी मिल की 1008 एकड़ जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और वर्ष 2014 में भी अंश भूमि बिक्री के बावजूद मिल चालू नहीं हो सकी।
चार विधायकों के पत्र और गन्ना उद्योग मंत्री के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक आदेशों पर पुनर्विचार होता है या नहीं और मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप चकिया चीनी मिल को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।