कालों के काल महाकाल की नगरी उज्जैन के मॉडल को अपनाते हुए मुजफ्फरपुर नगर निगम एक नई अनूठी पहल शुरू करने जा रहा है। इस पहल के तहत मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों और फलों का फिर से उपयोग कर अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाई जाएगी। यह पहल नए वर्ष में शुरू की जाएगी और इसके लिए नगर निगम ने तैयारियों में तेजी ला दी है। इससे न केवल भक्तों की आस्था को एक नया आयाम मिलेगा बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन का दायित्व भी पूरा होगा। इसके अलावा, इस पहल के माध्यम से रोजगार सृजन और सशक्तिकरण का भी अवसर मिलेगा। नगर निगम की एक टीम को प्रशिक्षण के लिए उज्जैन भेजा जाएगा, जहां वह इस प्रक्रिया को सीखकर मुजफ्फरपुर में लागू करेगी।
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उज्जैन नगर निगम द्वारा संचालित इस परियोजना से प्रेरणा ली गई है, जिसमें मंदिरों से निकलने वाले फूलों का उपयोग अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाने में किया जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य मंदिरों से निकले फूलों और उनके सूखे वेस्ट का पुनः उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण और जनहित में आय उत्पन्न करना है। इस पहल की चर्चा पूरे देश में है और अब मुजफ्फरपुर नगर निगम इसे अपनाने जा रहा है।
मुजफ्फरपुर नगर निगम की सात सदस्यीय टीम, जिसमें कई महिला कर्मचारी भी शामिल हैं, उज्जैन जाकर अगरबत्ती निर्माण की तकनीक और प्रक्रिया सीखेंगे। इसके बाद इस तकनीक को मुजफ्फरपुर में लागू किया जाएगा। टीम को पूरी प्रक्रिया की प्रशिक्षण भी दी जाएगी और इसके बाद उत्पादों को पैकिंग कर बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। नगर निगम प्रशासन इस पहल को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
नगर आयुक्त विक्रम विरकर ने बताया कि इस पहल के माध्यम से भक्तों की आस्था का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की तर्ज पर यह अनोखी अभियान शुरू की जा रही है। इसके तहत भक्तों द्वारा चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा कर सुखाया जाएगा और फिर प्रोसेस कर अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाई जाएगी। इस प्रक्रिया से भक्तों के चढ़ावे का पुनः उपयोग संभव होगा और उन्हें बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
विक्रम विरकर ने यह भी बताया कि इस पहल में महिलाओं को रोजगार मिलेगा। इसे बनाने वाली महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और यह पहल उनके लिए रोजगार का एक नया अवसर प्रदान करेगी। यही नगर निगम का मुख्य उद्देश्य है।