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Gopashtami: 128 वर्ष पुरानी परंपरा के साथ धूमधाम से मनाया गया गोपाष्टमी का पर्व, ऐतिहासिक गौशाला में हुआ आयोजन

Sat, 09 Nov 2024 06:59 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Gopashtami Festival: गौशाला के अध्यक्ष कृष्ण कुमार भारतीया ने कहा कि गोपाष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गायों के पालन-पोषण का संदेश दिया था, जो हिंदू धर्म में गौ सेवा के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रदर्शित करता है।
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श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह से मनाया गोपाष्टमी पर्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तिरहुत प्रमंडल के मुजफ्फरपुर जिले में गोपाष्टमी का पर्व परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर के ऐतिहासिक सिकंदरपुर गौशाला में आयोजित इस पवित्र उत्सव में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। अहले सुबह से ही भक्तगण गौ माता की पूजा-अर्चना के लिए वहां पहुंचे। महिलाओं ने विशेष रूप से गायों को गुड़, घास और अन्य खाद्य पदार्थ खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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सुख-समृद्धि का वरदान मिलने की मान्यता
सैकड़ों भक्तों ने गोपाष्टमी के अवसर पर गायों का श्रृंगार किया और विधिपूर्वक पूजन किया। भक्तों का मानना है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गौ माता की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है।
 
गौशाला की 128 वर्ष पुरानी परंपरा
सिकंदरपुर गौशाला में पिछले 128 वर्षों से गोपाष्टमी का आयोजन किया जा रहा है। गौशाला के अध्यक्ष कृष्ण कुमार भारतीया ने इस पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गोपाष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गायों के पालन-पोषण का संदेश दिया था, जो हिंदू धर्म में गौ सेवा के प्रति जिम्मेदारी की भावना को प्रदर्शित करता है। भारतीया ने यह भी बताया कि गौशाला की इस पुरानी परंपरा को हर वर्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसे आगे भी इसी उत्साह से जारी रखा जाएगा।
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भक्तों में दिखा खास उत्साह
पूरे दिन गौशाला में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महिलाएं और बच्चों समेत सभी ने गायों की पूजा की और उन्हें गुड़, घास और रोटी अर्पित की। श्रद्धालुओं के बीच एक विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस परंपरा को सहेजते हुए हर वर्ष इस उत्सव को भव्य तरीके से मनाया जाता है। यह पर्व मुजफ्फरपुर में हिंदू धर्म और संस्कृति का अद्भुत प्रतीक है।

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