बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित बालिका गृह कांड में एक नाबालिग लड़की को ढूंढने और सुराग में जुटे सीबीआई के दो सदस्यों की टीम सदर अस्पताल में पहुंची। हजारीबाग जिले का एड्रेस देकर बालिका गृह के सेवा संकप्ल विकास से ले गए थे दो लोग, जिन्होंने खुद को बच्ची का माता-पिता बताया था। सीबीआई की टीम ने बताया कि बच्ची जो कथित मां-बाप के द्वारा ले जाई गई थी। उसके पते और दिए गए दस्तावेज फर्जी निकले थे। इस मामले में हमें दोनों की तलाश है और बच्ची के इलाज करने वाले उस समय चिकित्सक की टीम की भी।
दरअसल, जिले के चर्चित शेल्टर होम कांड मामले में गुमशुदा एक नाबालिग बच्ची की तलाश को सीबीआई ने एक बार फिर से तेज कर दिया है। इसको लेकर के आज जिला सदर अस्पताल में अधीक्षक डॉ. बीएस झा के कक्ष में करीब एक घंटे से अधिक समय तक जानकारी ली। आपको बता दें कि सीबीआई की दो सदस्यों की टीम ने इस दौरान में यह भी जानकारी मांगी है कि गायब हुई बच्ची जिसको CWC सीतामढ़ी के द्वारा फर्जी तरीके से पत्र को जारी कर हजारीबाग जिले के बताए गए फर्जी दस्तावेज वाले मां-बाप को सौंपा गया था। मामले में CBI की टीम इस बात की जानकारी को जुटा रही है कि बच्ची को जिस डॉक्टर और टीम के द्वारा मानसिक रूप में बीमार बताया गया था, उसका इलाज किसने किया और इसका प्रमाण पत्र कैसे जारी किया गया था।
फर्जी आईडी देकर बने थे माता-पिता और फिर बच्ची को लेकर चले गए
सीबीआई की टीम के दो सदस्य में से एक एमके सिन्हा ने बताया कि अब तक की जांच में हमने गायब बच्ची की तलाश को अलग-अलग जिले में किया है। उसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। इसके अलावा झारखंड के हजारीबाग जिले के रहने वाले दो लोग जिन्होंने खुद को गायब बच्ची का माता-पिता बताकर के यहां से ले गए थे, उसकी एड्रेस भी गलत निकली थी। इसके साथ ही जो दस्तावेज वोटर आईडी के दिए गए, उसके अंदर रामचंद्र पासवान ने बतौर पिता जबकि शीतला देवी ने खुद को बच्ची के माता-पिता बताया था और फिर ले कर चले गए, जिस जगह का एड्रेस दिया गया था, वहां पर कोई भी इस नाम का व्यक्ति नहीं रहता है। इस बात की जानकारी हजारीबाग के बीएलओ ने भी अपनी लिस्ट और ग्रामीण के द्वारा लिए गए जानकारी में भी नहीं है। यानी पूरी तरह से गलत पता देकर नाबालिग बच्ची को यहां से ले जाया गया था।
CBI को मेडिकल रिपोर्ट और फर्जी माता पिता की है, अब तलाश सुराग ढूंढने में लगी
साल 2018 के चर्चित शेल्टर होम कांड मामले में अब तक कार्रवाई में सभी बच्ची का सुराग की ढूंढ लिया गया है। लेकिन साल 2015 में ले जाया जा चुकी नाबालिग लड़की की अब तक तलाश नहीं हो पाई है। जबकि कांड को साल 2018 में शेल्टर होम कांड के मामले में आने के बाद सीबीआई को जानकारी मिली।
आपको यह बता दें, अब सीबीआई को नालाबिग बच्ची के वैसे माता-पिता की तलाश है, जिसके बाद फर्जी तरीके से आईडी कार्ड देकर के बालिका गृह से ले जाया गया था, जिसमें हजारीबाग जिला के पता दिया गया था और इसके साथ ही बच्ची को ले जाए जाने के लिए CWC सीतामढ़ी जिला के एक अधिकारी के फर्जी तरीके से ऑर्डर किए गए पत्र के आधार पर रिलीज किया गया था। अब दोनों लोग रामचंद्र पासवान और शीतला देवी की तलाश है, जिनके द्वारा नाबालिग लड़की को ले जाया गया था।इस मामले में सीबीआई अलग-अलग जगहों पर जानकारी जुटा रही है कि आखिर वो कौन लोग थे, जिसके द्वारा इस तरह की मामले को अंजाम दिया गया था और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं।