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Success Story: गांव की गलियों से निकलकर नेशनल कबड्डी रेफरी बनीं मोनिका कुमारी, पूरे बिहार का बढ़ाया मान

Fri, 24 Jul 2026 08:56 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

मुजफ्फरपुर की बहू मोनिका कुमारी का चयन राष्ट्रीय कबड्डी रेफरी (नेशनल टेक्निकल ऑफिशियल) के रूप में हुआ है। पूरे बिहार से केवल तीन लोगों का चयन हुआ, जिनमें मोनिका भी शामिल हैं।
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संघर्ष से बनी नेशनल रेफरी
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विस्तार
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मुजफ्फरपुर जिले की बहू मोनिका कुमारी ने न केवल जिले, बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। उनका चयन कबड्डी खेल की राष्ट्रीय रेफरी (नेशनल टेक्निकल ऑफिशियल) के रूप में हुआ है। बचपन से गांव की गलियों में कबड्डी खेलते हुए इस खेल में अपना भविष्य बनाने का सपना देखने वाली मोनिका कुमारी ने नेशनल टेक्निकल ऑफिशियल (रेफरी) की परीक्षा पास कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पूरे बिहार से महज तीन खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें मोनिका भी शामिल हैं। उनका परिणाम बुधवार को घोषित हुआ, जिसके बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
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मोनिका कुमारी बनीं रेफरी
कबड्डी खिलाड़ी से रेफरी बनीं मोनिका कुमारी बताती हैं कि इस खेल के प्रति उनकी रुचि कोई नई नहीं है। बचपन से ही वह कबड्डी खेलती आ रही हैं। गांव से शहर और फिर महानगर तक का उनका सफर करीब डेढ़ दशक का रहा है। दरभंगा जिले के हथौड़ी निवासी गणेश प्रसाद सिंह की बेटी मोनिका का जन्म 18 अक्टूबर 1987 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दरभंगा में हुई। इसके बाद उन्होंने चेन्नई और फिर मुजफ्फरपुर से शारीरिक शिक्षा (फिजिकल एजुकेशन) की पढ़ाई पूरी की। लगातार परिश्रम, बेहतर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के कारण आज वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। खेल के प्रति उनकी निरंतर रुचि ने उन्हें यह सफलता दिलाई है।

शिक्षा मित्र से पीजी टीचर और अब नेशनल रेफरी के रूप में चयन
मोनिका कुमारी बताती हैं कि वर्ष 2016 से वह जिला और राज्य स्तर पर कबड्डी रेफरी के रूप में कार्य कर रही हैं। लगभग दस वर्षों के अनुभव के बाद अब उनका चयन राष्ट्रीय रेफरी के रूप में हुआ है। वर्तमान में वह वर्ष 2024 से राजकीय मध्य विद्यालय, झपहा में पीजी टीचर (शारीरिक शिक्षा) के रूप में कार्यरत हैं। वह मुजफ्फरपुर के अलावा आसपास के कई जिलों और पटना तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में भी बेहतर खिलाड़ियों को तैयार करना और देश का नाम रोशन करना है।
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सीएम नीतीश कुमार और राज्यपाल कर चुके हैं सम्मानित
मोनिका कुमारी बताती हैं कि खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन और बेहतर रेफरी के रूप में कार्य करने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी उन्हें पटना सहित विभिन्न स्थानों पर सम्मानित कर चुके हैं। उनके अनुसार, यह सम्मान उनके लिए गर्व के साथ-साथ आगे बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।

शादी के बाद जीवन में आया था ठहराव
मोनिका कुमारी बताती हैं कि इंटर की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2006 में उनकी शादी हुई। उनका ससुराल मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के टेंगराहा गांव में है। उनकी शादी सेना से जुड़े परिवार में हुई थी। उनके ससुर सेना में थे और उनके पति निजी कंपनी में कार्यरत हैं। इसी दौरान उनका चयन शिक्षा मित्र के रूप में हो गया। कुछ वर्षों बाद उनके ससुर का तबादला चेन्नई हो गया, जिसके बाद पूरा परिवार वहीं रहने लगा।

संघर्षों के बावजूद हार नहीं मानी
इस दौरान उनके दो बच्चों का जन्म हुआ। चेन्नई में रहते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में इतिहास विषय से स्नातक में दाखिला लिया। इसके बाद मुजफ्फरपुर लौटकर वर्ष 2015 में बी.पी.एड. में प्रवेश लिया और वर्ष 2017 सत्र पूरा किया। इसी दौरान उन्होंने इग्नू से एमए भी किया। वर्ष 2016 में ससुर के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजरने लगा। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण केंद्रों और निजी विद्यालयों में पढ़ाना शुरू किया। संघर्षों के बीच उन्होंने अपने खेल और करियर दोनों को आगे बढ़ाया और आज इस मुकाम तक पहुंचीं।

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मेरी सफलता में पति का सबसे बड़ा योगदान रहा
नेशनल रेफरी मोनिका कुमारी बताती हैं कि उनके पति अनिल कुमार सिंह वर्तमान में एक निजी कार शोरूम में टीम लीडर (टीएल) के पद पर कार्यरत हैं। खेल के प्रति उनकी रुचि और बेहतर रेफरी बनने के सफर में उनके पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया। जरूरत पड़ने पर वह बच्चों की देखभाल करते थे और कई बार अपनी ड्यूटी तक छोड़ देते थे। उन्होंने कभी भी उनका हौसला कम नहीं होने दिया। मोनिका कहती हैं कि पति और ससुराल पक्ष ने उन्हें मायके से भी अधिक सहयोग और प्रेरणा दी। उनकी सफलता के लिए उनके पति ने अपनी नौकरी तक का त्याग किया।
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'जीवन में कभी भी लक्ष्य के प्रति निराश नहीं होना चाहिए'- मोनिका कुमारी
कबड्डी की नेशनल रेफरी बनीं मोनिका कुमारी का कहना है कि जीवन में कभी भी लक्ष्य के प्रति निराश नहीं होना चाहिए। ड्यूटी, प्रशिक्षण और काम के दौरान आने वाली बाधाओं से घबराने के बजाय उनका समाधान खोजते हुए आगे बढ़ना चाहिए। यदि सही लक्ष्य, सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कोशिश करने वाले कभी हारते नहीं। आज इसका परिणाम है कि वह नेशनल रेफरी बनी हैं और भविष्य में भी खेलों को आगे बढ़ाने तथा नए खिलाड़ियों को तैयार करने में अपना योगदान देती रहेंगी।

 

 

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