मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित खुशी अपहरण कांड मामले में गुरुवार को पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अरुण कुमार झा ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को निर्देश दिया कि अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
गौरतलब है कि ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के लक्ष्मी चौक स्थित परमिया टोला से सरस्वती पूजा पंडाल के दौरान चार वर्षीय मासूम खुशी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। घटना के बाद से अब तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार ने कोर्ट को बताया कि पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। इसके बावजूद सीबीआई ने 20 दिसंबर 2022 को, यानी आदेश के लगभग 15 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की। प्राथमिकी के 42 दिन बाद सीबीआई ने मामले का रिकॉर्ड स्पेशल कोर्ट में मंगाने की अर्जी दी।
पढे़ं: पूर्णिया में 10 साल से जिस कंपनी को दिया खून-पसीना, उसी के प्रेशर ने ले ली जान? फंदे से लटका मिला शव
याचिका में यह भी कहा गया कि प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग एक वर्ष बाद अनुसंधानकर्ता ने पॉलिग्राफी टेस्ट कराने की अनुमति मांगी। साथ ही, एक महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग की अब तक जांच नहीं की गई है, जिसमें कहा गया था कि खुशी पटना से मुजफ्फरपुर में है और दो लाख रुपये खर्च करने पर उसका पता चल सकता है।
सीबीआई ने मार्च 2023 में सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि खुशी कुमारी के बारे में जानकारी देने या उसे खोजने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।
अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि 5 दिसंबर 2022 के आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि खुशी अपहरण कांड की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाए। साथ ही, मुजफ्फरपुर के तत्कालीन एसएसपी को जांच में विलंब करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।