मुखिया ने बताया कि दुर्गा सहनी की बेटियां श्रीमती देवी, शारदा देवी और पिंकी देवी तथा उनके नाती ने अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट पहुंचाया। पिंकी देवी ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत घोसौत गांव के वार्ड संख्या-9 निवासी 65 वर्षीय दुर्गा सहनी का मंगलवार को निधन हो गया। दुर्गा सहनी की तीन बेटियां हैं और उनका कोई पुत्र नहीं था। ऐसे में जीवनभर उनकी देखभाल बेटियों ने ही की और निधन के बाद भी अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने ही निभाई।
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पिता की मौत के बाद जब अर्थी को कंधा देने के लिए कोई पुरुष आगे नहीं आया, तब तीनों बेटियों ने स्वयं अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचाया। वहां सबसे छोटी बेटी पिंकी देवी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। बेटी द्वारा मुखाग्नि देने की घटना पूरे गांव और आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
स्थानीय मुखिया अखिलेश राम ने बताया कि दुर्गा सहनी का जीवनकाल में अपने पट्टीदारों से विवाद रहता था। निधन के बाद कुछ पट्टीदार अंतिम संस्कार को लेकर बेटियों पर दबाव बनाने लगे। इस दौरान बेटियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचे और बेटियों को उनके अधिकारों की जानकारी दी। इसके बावजूद कुछ लोग नहीं माने, जिसके बाद पुलिस को सूचना देने की बात कही गई। इसके बाद मामला शांत हुआ।
मुखिया ने बताया कि दुर्गा सहनी की बेटियां श्रीमती देवी, शारदा देवी और पिंकी देवी तथा उनके नाती ने अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट पहुंचाया। पिंकी देवी ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। वहीं, किसी भी पट्टीदार ने न तो अर्थी को कंधा दिया और न ही श्मशान घाट पहुंचा। बाद में गांव के कुछ लोगों ने सहयोग कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। बेटियों द्वारा पिता को कंधा देने और मुखाग्नि देने की यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।