मुजफ्फरपुर में बढ़ती गर्मी और उमस के कारण एस के एम सी मेडिकल कॉलेज के पीकू वार्ड में भर्ती एक बच्चे में एईएस (एलेक्टिव एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम) की पुष्टि हुई है। इसके बाद अस्पताल में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जिनमें से 15 केस केवल मुजफ्फरपुर जिले के हैं। हालांकि, सभी बच्चों का इलाज होने के बाद वे घर लौट चुके हैं। नए केस आने के बाद और अन्य बच्चों के भर्ती होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जिले में दो दिनों के भीतर दो नए केस सामने आए हैं, जो जिले के अलग-अलग प्रखंडों से हैं। पीकू वार्ड में कुल मामलों में तीन बच्चे गोपालगंज, शिवहर और सीतामढ़ी जिलों से हैं।
मुजफ्फरपुर में जैसे-जैसे गर्मी और उमस बढ़ रही है, वैसे-वैसे चमकी बुखार यानी एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) के मामले भी बढ़ने लगे हैं। बीते दो दिनों में दो नए केस सामने आए हैं, जिससे अब तक कुल मरीजों की संख्या 18 हो गई है। इसके अलावा कई बच्चे तेज बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। ये मामले मुजफ्फरपुर जिले के पांच प्रखंडों – मुसहरी, मोतीपुर, पारू, बोचहा और कुढ़नी – से सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि इलाज के बाद सभी बच्चे अब तक घर लौट चुके हैं, जबकि नए मरीज का इलाज अभी अस्पताल में चल रहा है।
गर्मी और उमस को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है और जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। जिले के चार प्रखंड अब एईएस के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके बन गए हैं, जहां से अब तक कुल 15 केस सामने आ चुके हैं।
सर्जन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि अब तक एईएस यानी चमकी बुखार के कुल 18 मरीज मिले हैं, जिनमें से 15 मरीज मुजफ्फरपुर जिले के हैं। बाकी तीन मरीज सीतामढ़ी, शिवहर और गोपालगंज जिलों से हैं। सभी बच्चों का इलाज एसकेएमसीएच के विशेष पीकू वार्ड में किया गया है।
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डॉ. अजय ने बताया कि चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम अलर्ट है और प्रभावित इलाकों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को जानकारी दे रही है कि अगर किसी बच्चे में बुखार या एईएस के लक्षण दिखें तो तुरंत सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं।
उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक 'जीरो डेथ' की नीति पर काम किया जा रहा है, यानी किसी की भी मौत न हो, इसका पूरा प्रयास हो रहा है। इलाज के लिए अस्पताल में विशेष इंतजाम किए गए हैं, और लोगों से अपील की जा रही है कि इधर-उधर इलाज कराने की बजाय सिर्फ सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराएं।