मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में हुए भीषण अग्निकांड और छह मरीजों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन और सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने पर अब तक 13 निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को सील कर दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। मामले में एक अस्पताल प्रबंधक को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
एसडीएम के नेतृत्व में लगातार चल रही कार्रवाई
पूर्वी अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) तुषार कुमार के नेतृत्व में शहर के विभिन्न इलाकों में संचालित निजी अस्पतालों की जांच की जा रही है। शुक्रवार को एक अस्पताल को सील किए जाने के बाद शनिवार तक कुल 13 अस्पतालों और नर्सिंग होम्स पर कार्रवाई की जा चुकी है। जांच के दौरान कई संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया जाना, आवश्यक लाइसेंस और दस्तावेजों की कमी तथा अन्य नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
एसडीएम बोले- आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
एसडीएम तुषार कुमार ने बताया कि जिले के सभी निजी अस्पतालों की जांच तेज कर दी गई है। अब तक 13 संस्थानों को सील किया जा चुका है और कई अन्य अस्पताल भी जांच के दायरे में हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में फायर ऑडिट, सुरक्षा मानकों और अन्य आवश्यक नियमों का पालन नहीं पाया गया, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है। जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जा रही है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
मरीजों को एसकेएमसीएच में कराया गया शिफ्ट
प्रशासन ने सील किए गए अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है। अधिकारियों की निगरानी में मरीजों को श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में स्थानांतरित कराया गया है, ताकि उनके उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए।
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मेडिकल कॉलेज के आसपास ही चल रहे थे अवैध अस्पताल
जिन अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों पर कार्रवाई की गई है, उनमें बालाजी हेल्थ केयर, रेडियस हेल्थ केयर, संतोष चाइल्ड केयर हॉस्पिटल, आशा हेल्थ केयर, श्री गंगाराम इमरजेंसी हॉस्पिटल, तिरुपति नर्सिंग होम, आयुष्मान हेल्थ केयर एंड हॉस्पिटल, सम्राट हॉस्पिटल, एसएस हॉस्पिटल, हेल्थ केयर एंड हॉस्पिटल, भूमि चाइल्ड केयर हॉस्पिटल और ओम अल्ट्रासाउंड समेत अन्य संस्थान शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई अस्पताल उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच के आसपास संचालित हो रहे थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि लंबे समय से इन संस्थानों की निगरानी और जांच क्यों नहीं की गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
प्रसाद अस्पताल अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी निजी अस्पतालों की व्यापक जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।