बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में किशोरी के अपहरण के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट-एक ने सोमवार को दोषी ईश्वरचंद्र कुमार उर्फ ईश्वरचंद्र पंडित को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार ने अदालत के समक्ष तीन गवाहों को पेश किया था।
जानकारी के अनुसार, करीब छह महीने पहले पीड़िता की मां ने कटरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी पुत्री 27 फरवरी को घर से बाजार जाने के लिए निकली थी, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें किशोरी के अपहरण की जानकारी मिली।
पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि गांव के ईश्वरचंद्र कुमार ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर शादी की नीयत से उनकी पुत्री का अपहरण कर लिया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी किशोरी को एक दिन अपने घर में रखने के बाद बस से हरियाणा ले गया था। आरोपी के एक रिश्तेदार से जानकारी मिलने के बाद पुलिस हरियाणा पहुंची और किशोरी को बरामद कर लिया।
27 जून को दाखिल किया गया था आरोप पत्र
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 27 जून 2026 को आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान विशेष पॉक्सो कोर्ट-एक के विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार ने तीन गवाहों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट-एक के न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्रा ने ईश्वरचंद्र कुमार उर्फ ईश्वरचंद्र पंडित को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फरवरी में हुई घटना के मामले में करीब छह महीने के भीतर फैसला आने से न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई।