मोतिहारी शिक्षा विभाग में घूसखोरी का बड़ा आरोप
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बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। बनकटवा प्रखंड के मध्य विद्यालय चनरी के निलंबित शिक्षक अनिल कुमार ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय में कार्यरत किरानी शिवनाथ भारती पर निलंबन खत्म कराने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद डीईओ राजन गिरी ने आरोपी कर्मी से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
निलंबन खत्म कराने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप
शिक्षक अनिल कुमार ने लिखित शिकायत में कहा है कि उनका निलंबन समाप्त कराने के लिए डीईओ कार्यालय में कार्यरत शिवनाथ भारती ने उनसे डेढ़ लाख रुपये लिए। शिक्षक का आरोप है कि रकम लेने के बाद भी उनसे और पैसे की मांग की गई। जब उन्होंने अतिरिक्त राशि देने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने सीधे क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक (आरडीडीई) कार्यालय में अपनी बात रखी।
आरडीडीई कार्यालय से खत्म हुआ निलंबन
शिक्षक के मुताबिक, आरडीडीई कार्यालय में सुनवाई के बाद उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने कई बार शिवनाथ भारती से अपनी दी गई राशि वापस मांगी, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। आखिरकार उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी को देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
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डीईओ ने आरोपी कर्मी से मांगा स्पष्टीकरण
शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी कर्मी शिवनाथ भारती से स्पष्टीकरण तलब किया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद आरोपों की जांच की जाएगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल आरोपी कर्मी की ओर से इस मामले में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या बोले डीईओ?
जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी ने बताया कि शिक्षक की शिकायत मिलने के बाद संबंधित कर्मी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि जवाब आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अगर जांच में शिक्षक के लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। साथ ही शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है। अब पूरे मामले में विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।