वैशाली जिले में नवजात शिशु की अदला-बदली से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बड़ी करवाई की है। जांच अधिकारियों के प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी ने सात कर्मचारियों पर कार्रवाई की।
जांच में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए चिकित्सक और कर्मचारी
जिलाधिकारी के आदेश पर तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसमें अपर समाहर्ता को अध्यक्ष बनाया गया। समिति ने संबंधित अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की और सभी बिंदुओं पर गहन जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं दिए गए, जिससे प्रथम दृष्टया कर्तव्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता परिलक्षित हुई। इसके आधार पर जिलाधिकारी ने दोषी पाए गए कुल सात कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश वैशाली सिविल सर्जन को दिए।
चिकित्सकों का हुआ तबादला
जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिलाधिकारी की स्वीकृति के उपरांत तीन चिकित्सकों सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया, जबकि आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत दो कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
कैसे शुरू हुआ मामला?
मामले की शुरुआत 4 फरवरी की सुबह गोरौल थाना क्षेत्र निवासी गुंजन देवी के प्रसव के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल में भर्ती होने के साथ हुई। आरोप है कि पहले अस्पताल के एक कर्मचारी ने पुत्र जन्म की जानकारी दी। करीब एक घंटे बाद जब शिशु को पुत्र की जगह पुत्री सौंपा गया, तो परिवार ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉक्टर और नर्स पर नवजात शिशु बदलने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। सूचना पर नगर थाना की पुलिस ने आक्रोशित परिवार को शांत कराया।
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पीड़िता की बहन ने की थी शिकायत
पीड़िता की बहन संजू सिंह ने नगर थाना में डॉक्टर और अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ नवजात की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी और जिलाधिकारी को भी आवेदन दिया था। जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है।