वैशाली जिले के महनार थाना क्षेत्र में सूखे नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस मुख्यालय स्तर पर की गई बड़ी कार्रवाई ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। नशा तस्करों को संरक्षण देने और उनसे कथित रूप से सांठगांठ रखने के गंभीर आरोपों के बाद महनार थानाध्यक्ष समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय पुलिसिंग और व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय द्वारा यह कार्रवाई पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जांच के दौरान बरामद एक पीली डायरी, संदिग्ध कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की गहन पड़ताल की गई। इन साक्ष्यों में पुलिसकर्मियों और नशा कारोबारियों के बीच गहरे संपर्क और संलिप्तता के संकेत मिले हैं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। हालांकि, इन सभी बिंदुओं की अंतिम पुष्टि विस्तृत विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीण एसपी सोनू कुमार राय ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जिन पुलिसकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है, उनमें महनार थानाध्यक्ष वेदानंद सिंह, राजेश कुमार (एएसआई एवं डायल-112 प्रभारी), राजीव कुमार (सिपाही), निशा कुमारी (महिला सिपाही), रौशन कुमार (चौकीदार), राजन पासवान (चौकीदार), रघुनाथ कुशवाहा (चौकीदार) और पुतलेश कुमार (चौकीदार) शामिल हैं। एक साथ थाने के प्रभारी से लेकर निचले स्तर के कर्मियों पर हुई इस कार्रवाई ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्र के स्थानीय लोगों में चर्चा है कि जब महनार को नशामुक्त करने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर थी, वही अगर तस्करों के मददगार बन जाएंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? अब यह जांच का विषय है कि इस संगठित नेटवर्क की जड़ें और कहां तक फैली थीं और किसकी शह पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। पुलिस मुख्यालय की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि महनार में नशे के अवैध कारोबार और खाकी के कथित गठजोड़ की परतें अब तेजी से उघड़ने लगी हैं।