शाली जिले के इतिहास के सबसे दर्दनाक हादसों में से एक देसरी थाना कांड संख्या 495/22 में अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। हाजीपुर के विशेष न्यायाधीश (उत्पाद) सुनील दत्त की अदालत ने करीब ढाई साल पहले 8 मासूम बच्चों की जान लेने वाले बेकाबू ट्रक के चालक लालू कुमार को दोषी करार देते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
हादसे का पूरा मामला
यह मामला 21 नवंबर 2022 की रात का है। देसरी थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर और बिलट चौक के पास भुइयां बाबा की पूजा का आयोजन हो रहा था। ठंड के बीच हजारों श्रद्धालु और बच्चे वहां एकत्रित थे। इसी दौरान हाजीपुर की ओर से आ रहे अनियंत्रित ट्रक ने भीड़ में घुसकर हाहाकार मचा दिया। इस भयावह मंजर में 8 मासूम बच्चों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर ट्रक पीपल के पेड़ से टकराकर रुक न गया होता तो मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती थी।
अदालत में सुनवाई और सबूत
मामले में कुल 12 गवाहों ने गवाही दी। फोरेंसिक साइंस विशेषज्ञ भी अदालत में उपस्थित हुए। ब्लड और यूरिन टेस्ट में ट्रक चालक के शरीर में 45% अल्कोहल पाया गया। इसके आधार पर अदालत ने इसे शराब पीकर वाहन चलाने और गंभीर लापरवाही के रूप में स्वीकार किया। विशेष लोक अभियोजक लक्ष्मण प्रसाद राय ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट ने केस को तार्किक परिणति तक पहुंचाने में रीढ़ का काम किया। नवादा निवासी ट्रक चालक लालू कुमार को अस्पताल ले जाने के बाद उसके ब्लड और यूरिन के नमूने लिए गए थे, जिनमें अल्कोहल की उच्च मात्रा पाई गई।
अदालत ने लालू कुमार को आईपीसी की धारा 404 के तहत 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 37 के तहत शराब पीने के आधार पर उसे दोषी करार दिया गया और 5 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। लालू कुमार नवादा जिले के रजौली थाना क्षेत्र, मलिया तरी अम्बान का निवासी है।
पीड़ित परिवार की व्यथा
हादसे में स्थानीय मनोज कुमार के बेटे की भी मौत हुई थी। इस केस ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश फैलाया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि सभी सबूतों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने दोषी को सजा दिलाई।
फॉरेंसिक जांच और भूमिका
- ब्लड और यूरिन टेस्ट में 45% अल्कोहल पाया गया।
- फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट ने केस को मजबूत बनाया।
- सभी गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया।