बिहार की राजनीति में हर दिन नई हलचल, हर गली में नया उबाल और अब यह उबाल अमर उजाला के चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ के साथ मुजफ्फरपुर की गलियों तक पहुंच चुका है। चाय की दुकानों से लेकर चौपालों तक, जनता की आवाज़ हर सवाल का जवाब और हर उम्मीद की पहचान बन रही है। 15 अक्टूबर की सुबह हमारी टीम ने सीधे मतदाताओं से संवाद किया, सुबह चाय की प्याली के बीच आम लोगों की राय जानी, दोपहर में युवाओं से मिलकर चुनावी मुद्दों और वोटिंग ट्रेंड्स की पड़ताल की गई। कौन है जिसकी ओर झुकी है जनता की नजर? उनकी उम्मीदें, सवाल और चाहत सब कुछ सामने आया। ‘सत्ता का संग्राम’ में हर आवाज बन रही है इस चुनावी कहानी का अहम हिस्सा, जो सीधे जनता के दिल से जुड़ी है।
'महागठबंधन की बनेगी सरकार'
निक्कू अब्बास ने कहा, “पढ़ाई के मामले में सिर्फ मुजफ्फरपुर, पटना और दरभंगा ही थोड़ा विकसित हैं, बाकी जगहों की स्थिति अच्छी नहीं है। तेजस्वी यादव के आने से उम्मीद है कि कुछ बेहतर बदलाव होगा और महागठबंधन की सरकार बनेगी।”
'यूनिवर्सिटी और एयरपोर्ट होना चाहिए'
अपनी समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “यहां के लोग काम के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन दूसरे राज्यों के लोग यहां काम करने नहीं आते।” वहीं सैयद हुसैन ने कहा, “यहां यूनिवर्सिटी और एयरपोर्ट होना चाहिए, ताकि युवा पढ़ाई पूरी कर नौकरी पा सकें। अभी यहां के लोग छोटी-छोटी नौकरियां करने को मजबूर हैं।”
प्रिंस कुमार ने कहा, “सरकार की हाल की योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन ये ज्यादा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई लगती हैं। अभी तो परीक्षाएं समय पर हो रही हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था।”
जनता चाहती है बदलाव
दाउद ने कहा, “अगर आप लोगों से बात करेंगे तो समझ आएगा कि जनता बदलाव चाहती है। प्रशांत किशोर कई जरूरी मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में पलायन सबसे बड़ी समस्या है और नीतीश कुमार के शासन में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।”
सईद अली अंसारी ने कहा कि वो बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी नौकरी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई का तरीका अभी भी पुराना है, जिसकी वजह से छात्रों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।