पुल न बनने से नाराज ग्रामीण युवा आंदोलन करने को मजबूर हुए
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बिहार के बेतिया में वर्ष 2019 में पिपरा गंडक नदी पर पुल निर्माण के लिए शिलान्यास किया गया था। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पुल निर्माण कार्य शुरू करने के लिए उद्घाटन भी कर दिया गया है। लेकिन अब तक नींव के लिए एक ईंट भी नहीं रखी गई है। इसे लेकर ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए मतदान का बहिष्कार किया है। मामला जिले के बैरिया प्रखंड के पखनाहा बाजार के पिपरा तमकुही का है।
बैरिया प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं ने पिपरा घाट पर पुल निर्माण को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इसके लिए आंदोलन तेज करने को लेकर युवाओं ने एक संगठन भी बनाया है, जिसका नाम बेतिया पखनाहा तमकुही पुल निर्माण संघर्ष मोर्चा रखा है। वहीं, शुक्रवार की शाम युवाओं ने गोलबंद होकर पखनाहा हाई स्कूल के प्रांगण में एक बैठक कर कहा कि ‘पुल नहीं तो वोट नहीं’ घर-घर का यह नारा है, अब की बार पुल हमारा है।
गोलबंद हुए संतोष कुमार गुप्ता, धनंजय जायसवाल, मनजीत कुमार, प्रेम कुमार, मनीष कुमार और अनिल कुशवाहा सहित सैकड़ों की संख्या में संगठन के सदस्यों ने कहा कि पिपरा गंडक नदी पर पुल नहीं बना तो लोकसभा और विधानसभा के वोट का बहिष्कार करेंगे। इस मुहिम को जगाने के लिए घर-घर अभियान चलाया जाएगा।
परिवहन मंत्री गडकरी ने किया था शिलान्यास
दरअसल, बेतिया के मनुआपुल में वर्ष 2019 में पथ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा पुल निर्माण के लिए शिलान्यास किया गया था। रक्सौल में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुल का उद्घाटन किया गया। लेकिन अभी तक पुल की नींव के लिए एक ईंट भी नहीं रखी गई। लोगों ने बताया कि 40 वर्षों से पुल निर्माण कराने का आश्वासन नेताओं द्वारा दिया जा रहा है। लेकिन अभी तक पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया है।
पुल बनने पर यूपी में दो घंटे में पहुंच जाएंगे बेतियावासी
आक्रोशित लोगों ने बताया कि पुल निर्मित हो जाने पर दो घंटे में बेतिया से यूपी के गोरखपुर में लोग चले जाएंगे। जबकि पुल निर्माण नहीं होने से लाखों की जनसंख्या प्रभावित है और उसे गोरखपुर जाने के लिए पांच से छह घंटे की दूरी तय करनी होती है। लोगों ने बताया कि यह पुल बिहार और यूपी के बॉर्डर पर है।