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Bihar News: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में भीषण आग, चार एकड़ सदाबहार जंगल राख, वन्यजीवों में मची भगदड़

Fri, 09 Jan 2026 08:45 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बगहा

सार

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर क्षेत्र में लगी आग ने घने वन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवा और सूखे खर-पतवार के कारण आग तेजी से फैली, जिससे कई वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान छोड़कर भागना पड़ा।
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धू-धू कर जलता जंगल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल-दो अंतर्गत मदनपुर वन प्रक्षेत्र के सिरिसिया जंगल में लगी आग ने प्रकृति के एक अनमोल हिस्से को पल भर में राख में बदल दिया। इस दर्दनाक घटना में करीब चार एकड़ सदाबहार वन क्षेत्र पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। जंगल में फैली सूखी झाड़ियां, खर-पतवार और सागवान के पत्ते आग की चपेट में आ गए, जिससे हरा-भरा इलाका काले धुएं और राख में तब्दील हो गया।

आग फैलने के साथ ही जंगल की शांति चीख-पुकार में बदल गई। सांप, हिरण, सांभर, चीतल, बंदर और खरगोश जैसे कई वन्य जीव अपने सुरक्षित ठिकानों को छोड़कर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। आग और धुएं के बीच वन्यजीवों की यह बेबसी जंगल की पीड़ा को साफ तौर पर बयां कर रही थी।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। प्रभारी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी नसीम अंसारी के नेतृत्व में वनकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अधिकारियों के अनुसार यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं किया जाता, तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था तथा आग आसपास के गांवों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया था।

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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से जलावन चुनने वाले कुछ लोग और चरवाहे अक्सर लापरवाही बरतते हैं, जिससे आग लगने की घटनाएं होती हैं। ठंड के मौसम में चलने वाली तेज पछुआ हवा आग को और भड़काने का काम करती है। इस बार भी तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलती गई और गांवों के काफी करीब तक पहुंच गई, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

ग्रामीणों के अनुसार मदनपुर जंगल में हाल के दिनों में आग लगने की यह दूसरी घटना है। इससे वन विभाग की सतर्कता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रभारी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी नसीम अंसारी ने बताया कि इस घटना में मुख्य रूप से सूखा खर-पतवार जला है, लेकिन इससे जंगल की जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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