दिमागी बुखार को लेकर समीक्षा बैठक करते डॉक्टर हर्षवर्धन
- फोटो : Twitter
बिहार के मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) सूर्यकांत तिवारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। यह आदेश उनके खिलाफ लापरवाही के एक मामले में दिया गया है जो बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के कारण मरने वाले बच्चों से संबंधित है।
सीजेएम मने एक समाजसेवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच एसीजेएम करेंगे। इससे पहले हर्षवर्धन और मंगल पांडे के खिलाफ मुजफ्फरपुर की सीजेएम अदालत में अदालत में मुकदमा दायर किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 28 जून को होगी।
वहीं बिहार दिमागी बुखार का मामला उच्चतम न्यायालय पहुंच चुका है। सोमवार को अदालत में इसपर सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र, बिहार और उत्तर प्रदेश सरकार से सात दिनों में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। जिसमें उनसे मुजफ्फरपुर में एईएस से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता से संबंधित सुविधाओं का विवरण मांगा गया है।
अदालत में दो वकीलों ने यह याचिका दाखिल की है। इस बीमारी के कारण अभी तक बिहार के मुजफ्फरपुर में 130 बच्चों की मौत हो चुकी है। वहीं पूरे बिहार में मरने वालों की संख्या 152 हो चुकी है। न्यायामूर्ति संजीव खन्ना और न्यायामूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने बिहार सरकार को चिकित्सा सुविधाओं, पोषण एवं स्वच्छता और राज्य में स्वच्छता की स्थिति की पर्याप्तता पर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।
सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश में भी पहले इसी तरह से कई लोगों की जान जा चुकी है। अदालत ने इसका संज्ञान लिया और राज्य सरकार को भी इस पर जवाब दाखिल करने को कहा। मामले पर अगली सुनवाई 10 दिन के बाद की जाएगी।