घटना को शर्मसार बताते हुए नीतीश कुमार ने कहा, 'घटना के बारे में मैं बहस नहीं करना चाहता हूं। यह शर्मसार करने वाली घटना है। पूरे सिस्टम में ही गड़बड़ी है। समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव ने ही इस पूरे मामले की जांच करवाया था। जिसे जो बोलना है बोले, हमलोग इस तरह की घटना से चिंतित हैं। हम शेल्टर होम की जिम्मेदारी एनजीओ को देने के खिलाफ हैं। मैंने समाज कल्याण विभाग को सलाह दी है कि ऐसे शेल्टर होम की निगरानी और संचालन राज्य सरकार द्वारा हो। यह काम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।'
वहीं लोकसभा में आज मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामला जोरदार ढंग से उठा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि महिलाओं एवं लड़कियों पर अत्याचार को कोई भी सहन नहीं कर सकता है, साथ ही सरकार से आग्रह किया कि इस मामले की जांच की ठीक तरह से निगरानी हो। शून्यकाल में कांग्रेस की रंजीत रंजन और राजद के जयप्रकाश नारायण यादव ने सदन में इस विषय को उठाया। इस विषय पर शोरशराबे के कारण सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये साढ़े 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
साढ़े 12 बजे बैठक दोबारा शुरू होने पर अध्यक्ष ने कहा कि जयप्रकाश नारायण यादव और रंजीत रंजन ने जो विषय उठाया है, वह केवल उनका मामला नहीं है बल्कि यह सभी का विषय है। उन्होंने कहा, 'महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार को कोई भी सहन नहीं कर सकता है। सरकार ने भी इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया है।’ सुमित्रा महाजन ने कहा कि सदस्यों ने जो विषय उठाया है, उस संदर्भ में वह कहना चाहती हैं कि सीबीआई सही तरीके से जांच करे और ठीक तरीके से निगरानी हो। वह सरकार से यही आग्रह कर सकती हैं।
बता दें कि भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर ने मांग की है कि सीबीआई जांच होने तक बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा से इस्तीफा ले लेना चाहिए। लेकिन वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने मंजू वर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि भाजपा पूरी तरह से मंजू वर्मा के समर्थन में है। उन्होंने कहा कि मंजू के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। साथ ही भाजपा ने कहा कि हम सीपी ठाकुर को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
सीपी ठाकुर के इस बयान के बाद राजनीति तेज हो गई है। इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इससे पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो पत्र लिखे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र लिखा है। इस पर जदयू के एक नेता कहा हैं कि राजभवन को कलम उठाने की पठकथा कहीं और लिखी गई है। इसके पीछे बिहार भाजपा नहीं है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह सब दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में हुआ हो। बता दें कि राज्यपाल के पत्र लिखने के बाद से ही यह चर्चा का विषय बना हुआ है।