मुंगेर में बाढ़ प्रभावित महिला अनीता देवी ने अस्पताल ले जाने के दौरान सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। तेज बारिश और आंधी के बीच परिजन किसी तरह उन्हें प्रसव केंद्र ले गए, जहां नर्स ने नवजात की नाभि काटी लेकिन अस्पताल में भर्ती करने और नाम दर्ज करने से मना कर दिया।
मुंगेर में बाढ़ और लगातार बारिश से हालात बेहद खराब हो गए हैं। सदर प्रखंड के कई पंचायत पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं, जहां से लोग जिला मुख्यालय के अलग-अलग इलाकों में शरण लेने को मजबूर हैं। सदर प्रखंड के जाफरनगर पंचायत के सीता चरण गांव से बाढ़ प्रभावित कई परिवार समाहरणालय स्थित के.सी. सुरेंद्र बाबू पार्क के पास पिछले एक सप्ताह से पॉलीथिन शीट के नीचे रह रहे हैं। इन्हीं में से एक परिवार—दिलीप सिंह, उनकी पत्नी अनीता देवी और छोटे-छोटे बच्चे—बुधवार को अचानक संकट में आ गए।
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अनीता देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिवार ने बारिश और आंधी के बीच किसी तरह एक ऑटो की व्यवस्था की। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही, सड़क पर ऑटो में बैठने के दौरान उन्होंने बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में परिजनों ने मां और नवजात को प्रसव केंद्र पहुंचाया, जहां नर्स ने बच्चे की नाभि काटी, कुछ दवाइयां दीं, लेकिन अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया।
परिवार का आरोप है कि नर्स ने नवजात का नाम रजिस्टर में दर्ज करने से भी इनकार कर दिया, जिससे सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं उन्हें नहीं मिल सकीं। मजबूरन वे मां और बच्चे को फिर बाढ़ राहत शिविर में ले आए। परिजनों ने नवजात का नाम ‘गंगा’ रखा है। उनका कहना है कि बाढ़ जैसी आपदा में प्रसूता महिलाओं के लिए सरकारी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है और अस्पताल ने भी गंभीर स्थिति में लापरवाही बरती है।