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Bihar: श्रावणी मेले में डमरू रूपी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, शिवभक्ति और लोककला का दिखा अद्भुत संगम

Tue, 04 Aug 2026 08:46 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर

सार

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान मुंगेर के असरगंज स्थित कच्ची कांवरिया पथ पर झारखंड के धनबाद निवासी शिवभक्त अजय विश्वकर्मा अपनी डमरू के आकार की अनोखी कांवड़ के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे। भगवान शिव के प्रिय वाद्य डमरू के स्वरूप में तैयार इस कांवड़ को देखने और उसके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।
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कामद यात्रा में पहुंचे श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान मुंगेर के असरगंज स्थित कच्ची कांवरिया पथ पर शिवभक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे लाखों कांवरियों के बीच झारखंड के धनबाद से आए शिवभक्त अजय विश्वकर्मा अपनी डमरू के आकार की अनोखी कांवड़ के कारण आकर्षण का केंद्र बने रहे। श्रद्धालुओं ने इस अनूठी कांवड़ को न केवल सराहा, बल्कि इसके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
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बोल बम और हर-हर महादेव से गूंज उठा कांवरिया पथ

श्रावणी मेले के अवसर पर असरगंज स्थित कच्ची कांवरिया पथ पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे लाखों शिवभक्तों के "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। भगवा वस्त्र पहने कांवरियों की लंबी कतारों के बीच डमरू रूपी कांवड़ सबसे अलग दिखाई दी।

डमरू के आकार की कांवड़ ने खींचा सभी का ध्यान

झारखंड के धनबाद निवासी अजय विश्वकर्मा भगवान शिव के प्रिय वाद्य डमरू के आकार में तैयार की गई विशेष कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं। इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती रही। कई कांवरियों और स्थानीय लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं, जबकि कई लोगों ने इस कांवड़ को बनाने की प्रक्रिया और इसके पीछे की प्रेरणा के बारे में भी जानकारी ली। आस्था, शिवभक्ति और लोककला का यह सुंदर संगम पूरे कच्ची कांवरिया पथ पर चर्चा का विषय बना रहा।
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सात वर्षों से लगातार कर रहे हैं पैदल यात्रा

धनबाद के भूली निवासी अजय विश्वकर्मा ने बताया कि वे पिछले सात वर्षों से लगातार सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल वे अपनी कांवड़ को अलग और आकर्षक स्वरूप देने का प्रयास करते हैं। इस बार उन्होंने भगवान शिव के प्रिय डमरू के आकार में कांवड़ तैयार करने का संकल्प लिया। अजय विश्वकर्मा ने बताया कि इस विशेष कांवड़ को तैयार करने में कई दिनों की मेहनत, धैर्य और लगन लगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से मिल रहे स्नेह, सम्मान और उत्साह ने उनकी सारी मेहनत को सफल बना दिया।

श्रद्धा, समर्पण और रचनात्मकता की बनी पहचान

श्रावणी मेले में हर साल अलग-अलग स्वरूप की कांवड़ श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती हैं, लेकिन इस बार डमरू रूपी कांवड़ ने विशेष पहचान बनाई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे अनूठे प्रयास भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक हैं। साथ ही यह भारतीय लोककला, धार्मिक परंपरा और रचनात्मकता की सुंदर झलक भी प्रस्तुत करते हैं।

 

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