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Bihar: पीपल के पत्तों पर महादेव की आकृति उकेर सैंड आर्टिस्ट ने शीबू सोरेन दी श्रद्धांजलि, लिखा- अलविदा गुरुजी

Mon, 04 Aug 2025 07:17 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर

सार

मधुरेंद्र ने दुनिया के सबसे छोटे महज 3 सेंटीमीटर पीपल के पत्तों पर तीन घंटे की मेहनत से महादेव की आकृति के भीतर विलीन हुए शिबू सोरेन का चित्र उकेरा और उस पर लिखा गुड बाय गुरुजी। उनकी यह कलाकृति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
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शिबू सोरेन को दी यूं श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर जैसे ही यह खबर फैली, बिहार के चर्चित अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार भावुक हो उठे। उन्होंने सावन के अंतिम सोमवार को पीपल के पत्तों पर महादेव की आकृति उकेरकर शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी।

मधुरेंद्र ने दुनिया के सबसे छोटे महज 3 सेंटीमीटर पीपल के पत्तों पर तीन घंटे की मेहनत से महादेव की आकृति के भीतर विलीन हुए शिबू सोरेन का चित्र उकेरा और उस पर लिखा गुड बाय गुरुजी। उनकी यह कलाकृति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उन्होंने बताया कि यह श्रद्धांजलि उन्होंने दो मिनट का मौन रखकर और भगवान शिव का स्मरण कर अर्पित की है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु का जाना देश के आदिवासी समाज, झारखंड और भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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बता दें कि शिबू सोरेन लंबे समय से किडनी की बीमारी सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें 19 जून 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक भी हुआ और तबीयत काफी बिगड़ गई। हालांकि इलाज के दौरान कुछ समय के लिए स्थिति में सुधार हुआ था, लेकिन लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद अंततः 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन से झारखंड ही नहीं, देशभर में राजनीतिक और सामाजिक जगत में गहरा शोक है। शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके थे और झारखंड आंदोलन में उनका योगदान अमिट है। उन्हें 'दिशोम गुरु' के रूप में आदिवासी समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था। उनके निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई राजनीतिक हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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