लखीसराय जिले के नागरिकों को पासपोर्ट बनवाने के लिए अब पटना या अन्य शहरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। 1 से 3 जुलाई तक समाहरणालय कार्यालय परिसर में पासपोर्ट मोबाइल वैन कैंप का आयोजन किया जा रहा है। यह पहल उन जिलों के लिए की गई है, जहां पासपोर्ट सेवा केंद्र नहीं हैं। लखीसराय के अलावा जमुई, मुंगेर, शेखपुरा और बेगूसराय के लोग भी इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
जानकारी के मुताबिक, पटना पासपोर्ट कार्यालय ने वर्ष 2024 में अब तक चार लाख से अधिक पासपोर्ट आवेदनों का निपटारा किया है। साथ ही, 12 मई 2025 से चिप लगे ई-पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं। यह कैंप इस वर्ष का दसवां शिविर है। इससे पहले सिवान, गोपालगंज, पूर्णिया और बगहा में भी इसी तरह के कैंप लगाए जा चुके हैं।
लखीसराय कैंप में नए पासपोर्ट और रिइश्यू (नवीनीकरण) के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। प्रतिदिन 55 अपॉइंटमेंट स्लॉट निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक आवेदकों को www.passportindia.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, शुल्क जमा करना होगा और फिर नियत तिथि पर कैंप में उपस्थित होना होगा।
कैंप में उपस्थित होने वाले नागरिकों को अपने मूल दस्तावेजों के साथ स्व-अभिप्रमाणित छायाप्रतियां भी साथ लानी होंगी। वहीं, फोटो खींचने, उंगलियों के निशान लेने और प्रमाण पत्रों की जांच की प्रक्रिया वहीं पूरी की जाएगी। पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) के लिए आवेदन या बिना अपॉइंटमेंट वाले आवेदनों को कैंप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पासपोर्ट बनवाने के इच्छुक नागरिकों को आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पते का प्रमाण और दो पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है।
इस कैंप को लेकर लखीसराय के लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय निवासी संतोष पांडेय ने बताया कि कैंप लगने से पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों को अब काफी राहत मिलेगी। पहले पासपोर्ट बनवाने के लिए दूसरे जिलों का चक्कर लगाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। अब यह सुविधा लखीसराय में मिलने से लोगों को बड़ी सहूलियत होगी।
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वहीं मधुकर कुमार ने कहा कि जब उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, तब उन्हें लंबी प्रक्रिया और कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब इस कैंप के माध्यम से लोगों को बेहतर और सुविधाजनक सेवा मिलेगी। उन्होंने यह भी मांग की कि लखीसराय में स्थायी पासपोर्ट सेवा केंद्र की स्थापना की जाए, ताकि भविष्य में भी लोगों को इसी तरह की सुविधाएं मिलती रहें। लोगों का मानना है कि यह कदम सरकार की 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' की नीति को साकार करता है और ग्रामीण तथा दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा।