अंचल अधिकारी ब्रजेश कुमार पाटिल को निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह निर्णय लिया है। मंगलवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए पत्र भी जारी कर दिया है। सदर सीओ ब्रजेश पाटिल को विभाग ने निलंबित अवधि में आयुक्त कार्यालय मुंगेर में रिपोर्टिंग करने का आदेश दिया है।
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पूर्व से हैं कई संगीन आरोप
बताया जाता है कि खगड़िया अंचल कार्यालय पर पहले से ही कई संगीन आरोप हैं। सीओ की कार्यशैली एवं कार्य भावना राजस्व प्रशासन के अनुकूल नहीं थी। समय पर जमाबंदी नहीं करने, जमाबंदी में मोबाइल नंबर एवं आधार समय पर नहीं करने, जमाबंदी का परिमार्जन नहीं करने तथा विभागीय कार्य में स्थिलता का आरोप बीते 15 फरवरी को डीएम अमित कुमार पांडेय के द्वारा किया गया था। इसके बाद यह कार्रवाई सरकार की तरफ से की गई है। गौरतलब है कि खगड़िया सदर अंचल बिहार के कुछ चुनिंदा अंचलों में है, जहां सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का खेल व्यापक पैमाने पर हुआ है।
सीओ की शिकायत हुई थी लंबी
सदर सीओ ब्रजेश कुमार पाटिल पर विभागीय आरोपों के इतर भी कई गंभीर आरोप लग रहे थे। सदर अंचल में दाखिल खारिज करने में लोगों से राजस्व कर्मियों द्वारा दोहन करने के मामले में भी कई शिकायत की गई थी। साथ ही उनके ऊपर आमजनों की शिकायत को तवज्जों नहीं देने जैसे कई गंभीर आरोप थे।
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सदर अंचल पर विभाग की विशेष नजर
खगड़िया जिले के सदर अंचल कार्यालय पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की नजर थी। सूबे में यह अंचल उन चुनिंदा अंचलों में शामिल है जहां पर व्यापक पैमाने पर अरबों के सरकारी जमीन की खरीद ब्रिक्री के मामले विभाग को मिले हैं। बीते वर्ष जिला लोक शिकायत निवारण ने एक वाद की सुनावई करते हुए खगड़िया अंचल में चल रहे इस खेल को पकड़ा था। जहां अंचलाधिकारी की मिलीभगत से सरकारी जमीन को भू-माफियाओं द्वारा बंदर-बांट कर लिया गया।
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सीओ की अनदेखी से अरबों का हुआ खेल
बीते वर्ष लोक शिकायत निवाराण द्वारा एक मामले की शिकायत में यह बात सामने आया था कि जिस जमीन को सरकारी भूमि दिखा अंचल म्यूटेशन पर रोक रहा है, उसकी रजिस्ट्री पर रोक के लिए सीओ की तरफ से कोई कारर्वाई नहीं हुई। वर्ष 2014 में ही सरकार के द्वारा सरकारी भूमि (गैर-मजरूआ खास, आम, बकास्त, कैसर-ए-हिंद, भू-अर्जित) भूमि की खरीद फरोक्त पर रोक है। जांच में यह सामने आया कि 2015 से वर्ष 2024 तक यह खेल चलता रहा। यानि खगड़िया सदर सीओ ने सिर्फ म्यूटेशन पर रोक लगाई, लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस को इसकी कोई सूचना नहीं दी।
निलंबित सीओ और निलंबन आदेश