बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अटकलों का दौर जारी है। इसी बीच बेगूसराय जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ एआईएसएफ के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। गुरुवार को होमगार्ड में चयनित अभ्यर्थियों और एक पत्रकार पर कथित बल प्रयोग के विरोध में एआईएसएफ ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी यात्रा निकाली।
यह जुलूस एसबीएसएस कॉलेज परिसर से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए पावर हाउस चौक तक पहुंचा, जहां आमसभा आयोजित की गई।
क्या है पूरा मामला
क्या है आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिहार के अन्य 37 जिलों में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया पूरी कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया, लेकिन बेगूसराय में चयनित 419 अभ्यर्थियों की फिजिकल, मेडिकल और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद आठ महीने से नियुक्ति नहीं दी जा रही थी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 26 फरवरी से वे धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए और तीन दिन बाद समाहरणालय के दक्षिणी द्वार पर भूख हड़ताल शुरू कर दी।
एआईएसएफ कार्यकर्ताओं में आक्रोश
सरकार पर हिटलरशाही का आरोप
पावर हाउस चौक पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के जिलाध्यक्ष अमरेश कुमार ने कहा कि सरकार के इशारे पर जिला प्रशासन ने अभ्यर्थियों के साथ हिटलरशाही रवैया अपनाया है, जिसकी संगठन कड़ी निंदा करता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और चयनित अभ्यर्थियों को जल्द नियुक्ति पत्र दिया जाए।
अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी कैसर रेहान और जिला उपाध्यक्ष वसंत कुमार ने भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पांच दिनों से भूखे-प्यासे बैठे छात्र-छात्राओं पर बल प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एसबीएसएस कॉलेज की सचिव रवीना कुमारी और नगर मंत्री विपिन कुमार ने की। इस दौरान साहिल कुमार और दिव्यांशु कुमार ने प्रतीकात्मक पुतले को मुखाग्नि दी। मौके पर सन्नी कुमार, पीयूष कुमार, विजय कुमार, संजीव कुमार, गोपी कुमार, दीपक कुमार सहित कई छात्र और एआईवाईएफ के शंभू देवा भी मौजूद थे।