चकाई प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक।
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बिहार के जमुई जिले के चकाई प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक बीते दो- तीन दिनों से ग्रामीणों के लिए भय का कारण बना हुआ है। रविवार की देर रात लगभग 11 बजे भोजन की तलाश में भटके हाथियों का एक दल नावाडीह गांव होते हुए प्रखंड मुख्यालय तक पहुंच गया। अचानक रिहायशी क्षेत्र में दाखिल हुए इन हाथियों ने चारों ओर उत्पात मचाना शुरू कर दिया। खेतों में पककर तैयार धान, अरहर की फसलें इन गजराजों के पैरों तले चंद मिनटों में तबाह हो गई।
इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। वहीं सोमवार को भी इसी अफरा-तफरी के बीच ग्रामीणों में दहशत का माहौल फैला हुआ है। सोमवार को हाथियों की चिंघाड़ सुनते ही लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे। भगदड़ के दौरान एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका हाथ टूट गया। कई ग्रामीणों को भी मामूली चोटें आईं।
वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची
रात-रात भर ग्रामीण भय में जी रहे और अपने घरों के बाहर पहरेदारी करते हुए हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। पूरे गांव में आतंक का ऐसा माहौल है कि लोग अपना दिनचर्या भी नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि सूचना मिलते ही चकाई पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
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अपील: हाथियों के नजदीक न जाएं और भीड़ न लगाएं
चकाई थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने स्थिति का निरीक्षण करते हुए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों के नजदीक न जाएं और भीड़ न लगाएं, ताकि जानवर और अधिक उग्र न हों। वहीं वन विभाग की टीम, फॉरेस्टर अभिमन्यु कुमार के नेतृत्व में, पटाखों की मदद से हाथियों को जंगल की ओर वापस खदेड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों और घायल ग्रामीणों को सरकारी प्रावधानों के तहत मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि हाथियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।