साल 2005 से अब तक के अपने कार्यकाल में सीएम नीतीश कुमार की यह 15वीं यात्रा होगी। उन्होंने पहली यात्रा 2005 में की थी। उनकी हर यात्रा का नामकरण होता है। उनकी पहली यात्रा न्याय यात्रा थी। उन्होंने 2009 में तीन यात्राएं कीं, इनमें पहली विकास यात्रा, दूसरी न्याय यात्रा और तीसरी प्रवास यात्रा थी। साल 2010 में वे विश्वास यात्रा पर निकले। साल 2011 में सेवा यात्रा निकाली। 2012 में नीतीश कुमार की 'अधिकार' यात्रा चली। 2014 में 'संकल्प' यात्रा और 'संपर्क' यात्रा पर निकले। 2016 में उनकी 'निश्चय' यात्रा तो 2017 में 'विकास कार्यों की समीक्षा' यात्रा हुई। विधानसभा चुनाव से पहले 2019 में उन्होंने जल-जीवन-हरियाली यात्रा और 2021 में 'समाज सुधार' यात्रा की। लोकसभा चुनाव के पहले 2023 में उनकी 'समाधान' यात्रा हुई थी। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले नीतीश कुमार अब 'महिला संवाद' यात्रा पर निकलने वाले हैं।
वर्ष 2019 में जल जीवन हरियाली यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शेखपुरा जिले के मटोखर गांव आये थे। उनके आगमन पर बड़े तामझाम से प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने के लिए जल जीवन हरियाली यात्रा में मटोखर को पेड़-पौधे से सजाया था। लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही जनता अरमानों पर पानी फिर गया। मटोखर में लगाए गए सैकड़ों पेड़ जहां पानी के आभाव में सूख गए हैं, वहीं बनारसी कलाकारों द्वारा निर्मित बॉस चचरी पार्क का नामोनिशान नहीं बचा है। मनरेगा से लाखों रुपये की लागत से आनन-फानन में बनाया गया तालाब घाट में नहाने वाला को नहीं दिख रहा है और तालाब की सीढ़ियों पर गंदगी बिखरी पड़ी है।
कृषि विभाग के द्वारा नवनिर्मित तालाब एवं वर्मी कम्पोस्ट खेती सूखे पड़े हैं। हद तो यह हो गई तालाब की सुंदरता के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बतख और हंसों का जोड़ा छोड़ा गया था, लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही ग्रामीण उस बतखों को पकड़कर खा गए। आश्चर्य तो और भी सुनकर होगा कि बतख के गायब मिलने की जानकारी होने एसडीओ दल-बल के साथ बतख खोजने निकले थे, घर-घर जाकर तलाशी ली गई थी, लेकिन बतख तो हजम हो चूका था। स्थानीय लोग अब कहने लगे हैं कि मुख्यमंत्री का जल जीवन हरियाली यात्रा एक मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल की तरह जो मुख्यमंत्री के जाते ही बंद हो गया।
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पूर्व भी मटोखर में मनरेगा द्वारा चार से पांच करोड़ रुपये की लागत से पेड़-पौधे लगाए गए थे। राशि अधिकारी एवं ठेकेदार की पेट में चली गयी, लेकिन हरियाली के नाम पर एक भी पौधा शेष नहीं रहा। इस बार भी उसी तरह की जमकर लूट मचाई गई। करोड़ों रुपये का टेंट, बैरिकेटिंग, हैलीपेड एवं सड़क निर्माण के नाम पर खर्च किया गया, लेकिन मटोखर की सूरत नहीं बदली। मुख्यमंत्री द्वारा तीन दिनों के अंदर पुरातत्व विभाग को सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देने एवं ऐतिहासिक खोज के खुदाई का भी आदेश दिया था, लेकिन सारी घोषणाएं अभी तक धरातल पर उतरती नहीं दिख रही है। हां मनरेगा से अधिकारियों की जेब जरूर मालामाल हो गया।
महसार में न बचा जिमखाना, अस्पताल का भी हाल बेहाल
समाधान यात्रा के सिलसिले में वर्ष 2023 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शेखपुरा के महसार गांव आए थे, उनके आगमन की तैयारी को लेकर गांव को शहर का शक्ल देने की कवायद की गई थी। पंचायती राज का सपना साकार करने के लिए पंचायत सरकार भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया था। जिम, हॉस्पिटल, स्कूल, सामुदायिक भवन, नल जल, जल जीवन जीवन हरियाली, सड़क, बिजली पर करोड़ों रुपये खर्चा किया गया था। लगा था कि महसार गांव सचमुच में शहर बन जाएगा। लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही सब कुछ वीरान होने लगा। आज डेढ़ साल में पानी के तरह बहाए गए करोड़ों रुपये का नामों निशान नहीं रहा।
पंचायत सरकार भवन के खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। दरवाजे अक्सर बंद ही रहते है। अंदर में चल रहा पंखा कभी बंद नहीं होता आदमी रहे या न रहे। एप्रोच पथ बतासे की तरह बिखर गए। परिसर में जहां तहां गड्ढा हो गया है और उस गड्ढे को तालाब समझकर भैस पूरा मज़ा लेती दिखती है, जिम के लिए लगाए गए समान टूट फुट गए, जिस पार्क का निर्माण किया था, उस पार्क में न कोई पेड़-पौधे बचे न ही कोई हरियाली। अस्पताल में न डॉक्टर न नर्स, लिहाज मरीज भी आना छोड़ दिया है। सूत्रों की माने तो महसार गांव के कायाकल्प के लिए पंचायत के मुखिया से लेकर जिला परिषद, विधायक एवं जिला प्रशासन के द्वारा 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च किया गया था। जल्दबाज़ी में काम हुआ था लिहाजा गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं थी। आलम यह हुआ कि जितने जल्दबाज़ी में काम हुई उतने ही जल्दी विकास कार्य गायब भी हो गए।
डीहा गांव के ग्रामीणों की नल जल योजना के तहत नहीं बुझी प्यास
शेखपुरा जिला अंतर्गत अरियरी प्रखंड क्षेत्र के डीहा गांव के वार्ड नंबर आठ में सात निश्चय योजना के तहत नल जल योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री के हाथों वर्ष 2017 किया गया था। हर घर नल का जल पहुंचाने हेतु पेयजल आपूर्ति केंद्र व फ्लोराइड युक्त मशीन शोभा की वस्तु बन कर रह गई है। सीएम आगमन के मद्देनज़र घर-घर पानी पहुंचाने हेतु कनेक्शन करा दिया गया और गाड़े गए बोरिंग फ़ैल हो जाने के कारण निजी बोरिंग से पानी आपूर्ति कराया गया था। लेकिन सीएम के जाने के कुछ माह तो पानी मिला, लेकिन उसके बाद में निजी बोरिंग से पानी आपूर्ति बंद हो गया। अब ग्रामीणों के समक्ष पुन: पानी की समस्या उत्पन्न हो गयी है और वे लोग खेत-खलिहान में लगे बोरिंग से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को विवश है तथा सात निश्चय योजना डीहा गांव में सफ़ेद हाथी बनकर रह गया।
मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर अधिकारी संभावित गांव का कर रहे हैं। दौरा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के यात्रा को लेकर जिला पदाधिकारी आरिफ अहसन सहित विभिन्न अधिकारियों द्वारा संभावित गांव का दौरा कर रहे हैं। संभावना है कि मुख्यमंत्री शेखपुरा जिला अंतर्गत सर्वा, माफो, गगौर, छठियारा व कुसुम्भा गांव आ सकते हैं, जिसको लेकर अधिकारियों विभिन्न योजनाओं के धरातल पर उतारने को लेकर पसीना बहा रहे हैं। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को विभिन्न विभागों के माध्यम से आमजनों को मिलने वाली सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जन-जन तक पहुंचाने, पंचायत सरकार भवन में सभी सुविधाएं जैसे बिजली, पेयजल, शौचालय, के साथ-साथ रंग-रोगन वृक्षारोपण आदि को मिशन मूड में कराने का निर्देश दिए हैं। जिला पदाधिकारी द्वारा स्कूलों में बच्चों को बैठने की समुचित व्यवस्था, सभी योग्य छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ उपलब्ध कराने, विद्यालय का रंग-रोगन एवं लाइट की व्यवस्था यथा शीघ्र प्रधानाध्यापक को करने का निर्देश दिए हैं।