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बिहार न्यूज: गंगा के सैलाब में डूबी आखिरी विदाई की राह, सिमरिया में शवयात्राओं को बदलना पड़ा रास्ता

Mon, 07 Sep 2026 09:16 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय

सार

बेगूसराय के सिमरिया इलाके में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बिंदटोली और मल्हीपुर बिंद टोली के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जबकि मल्हीपुर दक्षिण पंचायत के आठ वार्ड प्रभावित हैं। श्मशान घाट जाने वाली मुख्य सड़क डूबने के कारण शवयात्राओं को रामघाट की ओर रास्ता बदलना पड़ रहा है।
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सिमरिया में श्मशान जाने वाली सड़क डूबी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बेगूसराय के सिमरिया इलाके में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बिंदटोली और मल्हीपुर बिंद टोली के घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जबकि मल्हीपुर दक्षिण पंचायत के आठ वार्डों में पानी पहुंचने से बड़ी आबादी संकट में है। खेतों में पानी भरने से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल के डूबने की आशंका है। लेकिन बाढ़ की भयावहता का सबसे मार्मिक चेहरा तब सामने आया, जब लोगों को अपनों की आखिरी विदाई के लिए भी श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता बदलना पड़ा।

अंतिम विदाई की राह भी बाढ़ में डूबी

सिमरिया क्षेत्र में बाढ़ का पानी श्मशान घाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क तक फैल गया है। सड़क पर पानी जमा होने के कारण शवयात्रियों के लिए घाट तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरी में गंगा तट के पश्चिम स्थित रामघाट की ओर शव ले जाना पड़ रहा है। बाढ़ ने जहां लोगों के घर और खेत डुबो दिए हैं, वहीं अब अंतिम संस्कार जैसी जरूरी धार्मिक प्रक्रिया भी प्रभावित होने लगी है। श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता डूबने की स्थिति ग्रामीणों के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक, दोनों स्तरों पर बड़ी परेशानी बन गई है।

आठ वार्डों में घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी

मल्हीपुर दक्षिण पंचायत के पूर्व वार्ड सदस्य रौदी कुमार के अनुसार पंचायत के वार्ड संख्या 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14 और 15 बाढ़ से प्रभावित हैं। कई घरों में पानी प्रवेश कर चुका है। ऐसे में परिवारों के सामने अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में पानी भरने से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद होने की आशंका है। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

‘घर डूबे, चूल्हे बुझे, अब सुरक्षित ठिकाने की तलाश’

ग्रामीणों ने बताया कि गंगा का पानी लगातार बढ़ने के बाद कई घरों में पानी घुस गया है। इससे लोगों के सामने भोजन बनाने तक की समस्या खड़ी हो गई है। कई परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

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बाढ़ के बीच बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों के सामने घर और सामान बचाने के साथ परिवार के सदस्यों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी है।

चारा, शौचालय और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी संकट

बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दी है। मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। घरों और आसपास पानी भरने के कारण शौचालय जाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी चुनौती बन गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो लोगों के साथ-साथ मवेशियों को भी सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा। बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ग्रामीणों की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं।

दो दिनों में तेजी से बिगड़े हालात

ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो दिनों में बाढ़ की स्थिति तेजी से गंभीर हुई है। लोगों का आरोप है कि पानी लगातार बढ़ने के बावजूद मौके पर प्रशासनिक सक्रियता पर्याप्त नजर नहीं आ रही है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

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स्थानीय स्तर पर बरौनी अंचल के राजस्व पदाधिकारी को भी स्थिति की जानकारी दी गई है। राजस्व पदाधिकारी ने संबंधित कर्मचारी को मौके पर भेजकर स्थिति का जायजा लेने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
बाढ़ के बीच जहां ग्रामीण घर, खेत और मवेशियों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, वहीं श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता डूब जाने से अंतिम संस्कार जैसी जरूरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो गई है। सिमरिया में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन के सामने एक के बाद एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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