यात्रा में शामिल हुए लोग
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इन रूटों से गई यात्रा
यात्रा जयमंगलागढ़ से पूजा कर प्रारंभ हुई। यह मंझौल, राजौरा, मोहनपुर, पन्हास, हर हर महादेव चौक, जीरोमाइल, बीहट बड़ी दुर्गा मंदिर, सिमरिया, हाथीदह होते हुए मोकामा के बाबा परशुराम मंदिर पहुंच कर संपन्न हुई। संयोजक अवनीश कुमार उर्फ सिंह मालिक और शिवम ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य मिथिला और मगध की संस्कृति को जोड़ना है। उन्होंने बाबा परशुराम का आशीर्वाद लेकर राष्ट्र के विकास की कामना की।
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वहीं, अमन और सोनू कुमार ने बताया कि भगवान परशुराम की जयंती हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र के रूप में हुआ था। परशुराम का जन्म न्याय और धर्म की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। भक्तगण उनसे शक्ति, साहस और बुराई से सुरक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।