किसी ने फसल दिखाई, कोई मरी मछलियां दिखाते हुए किस्मत को कोसा।
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100 बीघा प्रभावित, किसानों का दावा- एक बार मुआवजा दिया गया था
किसानों के खेत जहां अभी भी पानी है, पेड़ सूख रहे हैं। मछलियां तालाब में मरी हुई नजर आ रही हैं। सब्जी उपजाने वाले किसान आठ-आठ आंसू रो रहे हैं। पौधों की कौन कहे, आम-महोगनी के पेड़ सूख रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि इस साल अत्यधिक पानी के कारण नुकसान ज्यादा हुआ है। लोगों ने कहा कि भूतपूर्व सांसद स्व. भोला सिंह के कार्यकाल में एक बार ऐसी विकराल समस्या आई थी तो रिफाइनरी प्रबंधन ने मुआवजा राशि भी दी थी। वैसे, अमूमन रिफाइनरी इसे अपना पानी मानने से ही इनकार करता है। पपरौर के मुखिया प्रतिनिधि अरविंद कुमार राय ने बताया पंचायत के रिहायशी इलाकों में रिफाइनरी का छोड़ा गया पानी है। रिफाइनरी की टैंक सफाई से छोड़ दिए गए पानी से जलजमाव की स्थिति बनी। पपरौर इलाके में करीब 50 बीघे और बीहट में करीब 50 बीघा भूमि में फसल को नुकसान पहुंचा है। रिफाइनरी तक बात पहुंचाई गई तो ह्यूम पाइप टाइप का उपयोग कर पानी को रोकने का प्रयास तो किया गया, लेकिन मौजूदा जल-निकासी और किसानों के मुआवजा पर ध्यान नहीं दिया गया।
रिफाइनरी ने जिस बांध की बात कही, उसका हाल भी दिखा
रिफाइनरी जहां इस रासायनिक दुर्गंध वाले पानी को अपना मानने से इनकार कर रहा है, वहीं आम ग्रामीणों का कहना है कि इसके लिए राज्य सरकार इस जल की जांच कराए। इस इलाके में और कोई औद्योगिक उपक्रम नहीं है और किसानों के खेत में आसमान से यह रासायनिक पानी आया नहीं होगा, इसलिए इसकी जांच से ही हकीकत सामने आ जाएगी। रिफाइनरी जिस बांध की बात करता है, 'अमर उजाला' को किसान उस जगह तक लेकर गए। यहां एक जगह पर साफ दिखा कि टूटे हिस्से से रिसता हुआ पानी किसानों के तालाब-जमीन की ओर आ रहा है। बोरा डालकर रोकने का प्रयास यहां बेकार नजर आ रहा है। बीहट के किसान डोमन सिंह कहते हैं यह पानी अभी कम है, कुछ समय पहले तक खूब धारा में आ रहा था। किसान पप्पू सिंह ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए पानी में ताजा हकीकत और मोबाइल में पड़े पुराने वीडियो को दिखाते हुए कहा कि इसी के कारण दो बीघे के तालाब की उनकी मछलियां मर गईं।
(ग्राउंड इनपुट- घनश्याम देव, बेगूसराय)