बिहार विधान परिषद में रेल कूपन व यात्रा भत्ते में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। प्रधान महालेखाकार की ड्राफ्ट रिपोर्ट में इसे उजागर किया गया है। पीएजी की रिपोर्ट में विधान परिषद में 2.64 करोड़ रुपये के रेल कूपन के फर्जीवाड़े का आरोप है।
एक हिंदी दैनिक के अनुसार यह रिपोर्ट तीन महीने पहले सरकार को दी गई थी। संसदीय कार्य विभाग ने दो महिने पहले विधान परिषद सचिवालय से कार्रवाई कर सरकार को प्रतिवेदन देने का अनुरोध किया था। उस पर आज तक जवाब नहीं मिला है। यह गड़बड़ी पकड़े जाने से कई सदस्यों अधिक ली गई राशि को वापस लौटाने के लिए भी तैयार दिख रहे हैं।
पीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ही दिन में अलग-अलग दिशाओं में रेल यात्र और सड़क यात्राएं की गई हैं। इसी आधार पर यात्र भत्ते व दैनिक भत्ते का भुगतान ले लिया गया। परिषद के रेल कूपन निर्गत रजिस्टर के मिलान से पता चला कि अप्रैल, 2006 से फरवरी, 2012 की अवधि में 105 सदस्यों को तीन करोड़ 27 लाख 66 हजार रुपये मूल्य के रेल कूपन निर्गत किये गये।
प्रावधान के अनुसार यात्रा की अवधि में एक हजार रुपये प्रति दिन दैनिक भत्ता व 15 रुपये किलोमीटर की दर से यात्रा भत्ते का भुगतान किया जाता है। इस प्रावधान का गलत फायदा उठाते हुए पटना में रहने के बावजूद राज्य से बाहर की यात्रा बता कर 79.62 लाख रुपये का यात्र भत्ता व दैनिक भत्ता भुगतान ले लिया गया।