बिहार सरकार के मंत्री जीवेश मिश्रा को राजस्थान की कोर्ट ने 15 साल पुराने नकली दवा केस में दोषी पाया है। कोर्ट ने उन्हें 7,000 रुपये जुर्माना लगाकर छोड़ा है। यह मामला उनके फार्मा कंपनी निदेशक रहते हुए साल 2010 में दवा मिलावट से जुड़ा था।
बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा को राजस्थान की राजसमंद कोर्ट ने 15 साल पुराने नकली दवा आपूर्ति मामले में दोषी करार दिया है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए 7,000 रुपये जुर्माना लगाकर और सदाचार बनाए रखने की हिदायत के साथ रिहा कर दिया। यह फैसला 4 जून 2025 को सुनाया गया था, जबकि सजा पर सुनवाई 1 जुलाई को हुई।
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मामला वर्ष 2010 का है, जब जीवेश मिश्रा राजनीति में आने से पहले दवा कारोबार से जुड़े थे। उस समय वह "आल्टो हेल्थलेयर प्राइवेट लिमिटेड" नामक फार्मा कंपनी के निदेशक थे। जांच में पाया गया कि राजस्थान की कंपनी "कंसारा ड्रग्स डिस्ट्रीब्यूटर" को जो दवाएं सप्लाई की गईं, उनमें से ‘सिप्रोलिन 500’ नामक दवा की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी और उसमें मिलावट पाई गई थी। यह दवा तीन कंपनियों द्वारा सप्लाई की गई थी, जिनमें से एक कंपनी जीवेश मिश्रा की थी। इस मामले में कोर्ट ने जीवेश मिश्रा समेत कुल 9 लोगों को दोषी ठहराया, लेकिन ऑफेंडर प्रोबेशन एक्ट के तहत उन्हें जेल की सजा से राहत दी गई और सिर्फ जुर्माना लगाया गया।
राजस्थान कोर्ट के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। राजद प्रवक्ता और जाले के पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की है कि जीवेश मिश्रा को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाए। उन्होंने कहा कि “जो व्यक्ति नकली दवाइयां बेच सकता है, वह जनता के साथ भी धोखा कर सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने स्वयं अपने चुनावी हलफनामे में यह जानकारी दी थी कि उन पर नकली दवा से जुड़ा मामला चल रहा है। ऋषि मिश्रा ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि “अब भी अगर नीतीश कुमार नहीं जागे, तो यह ईमानदारी और सुशासन के दावों की पोल खोल देगा।”