जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुखिया ने बेगूसराय से कन्हैया कुमार का महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि लालू ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव के समकालीन किसी नेता को उभरने नहीं देना चाहते।
त्यागी ने कहा, 'बेशक हमारी विचारधारा अलग है लेकिन हमारे मन में कन्हैया के लिए सहानुभूति है। वह अत्यधिक राजनीतिक विश्वासघात का शिकार हैं। लेफ्ट लालू के साथ हमेशा खड़ा रहा लेकिन उन्होंने कन्हैया को महागठबंधन का उम्मीदवार नहीं बनाया क्योंकि वह तेजस्वी के सिंहासन को बचाना चाहते थे।'
उन्होंने कहा, 'इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कन्हैया की लोकप्रियता तेजस्वी से ज्यादा है। यहां तक कि तेजस्वी को इस बात का डर था कि कन्हैया उन्हें राजनीतिक रेस में पीछे छोड़ सकते हैं।'
त्यागी का कहना है कि बेगूसराय से कन्हैया के चुनाव मैदान में उतरने से एनडीए को कड़ी चुनौती मिली है। उन्होंने कहा, 'कन्हैया को बेगूसराय में एनडीए और महागठबंधन के विरोध का सामना करना पड़ा है लेकिन वह चुनाव नहीं जीत पाएगा।'
केसी त्यागी का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब दो दिन पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कन्हैया को अपना प्रचार करने के लिए भोपाल बुलाया है। दिग्विजय ने कहा था, ''मैं कन्हैया का समर्थक हूं और मैं अपनी पार्टी में भी इस बात को कहा कि आरजेडी ने बहुत बड़ी गलती की है और मैंने कोशिश की बात करने कि यह सीट सीपीआई को देनी चाहिए। और मुझे इस बात की खुशी है आठ और नौ को वो प्रचार करने भोपाल आ रहे हैं।''
उन्होंने दावा किया था कि कन्हैया पर देश विरोधी नारे लगाने का झूठा आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि एक चैनल ने भाजपा और आरएसएस के लड़कों को खड़ा करके टुकड़े-टुकड़े के नारे लगवाए और दूसरों को बदनाम किया। दिग्विजय सिंह ने कहा था कि महात्मा गांधी और कार्ल मार्क्स में थोड़ा सा ही फर्क था।