जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नीतीश कुमार के बाद आरसीपी सिंह के बाद तीसरे नंबर के नेता केसी त्यागी का कहना है कि नीतीश कुमार कहीं से कमजोर नहीं हैं और न ही उनकी छवि धूमिल हुई है। उनका यह भी कहना है कि नरेंद्र मोदी एनडीए के नेता हैं। भाजपा का मतलब नरेंद्र मोदी हैं, न कि गिरिराज सिंह, प्रज्ञा सिंह ठाकुर और साक्षी महाराज टाइप के आवारा नेता। अमर उजाला के साथ उन्होंने खास बातचीत में कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
क्या वजह है कि इस बार आपकी पार्टी ने इस बार घोषणा पत्र नहीं जारी किया है? क्या आपकी पार्टी भाजपा के घोषणा पत्र में वर्णित सभी घोषणाओं का समर्थन करती है? मसलन, धारा 370 और देशद्रोह कानून।
के. सी. त्यागी: देखिए, जनता दल(यू) समाजवादी आंदोलन के गर्भ से पैदा हुई पार्टी है। जिसके पुरखे जेपी, लोहिया, चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर रहे हैं। इन सभी ने समाज में परिवर्तन की अलग धारा विकसित की। हम गैर कांग्रेसवाद को लेकर जनसंघ के साथ रहे हैं। हम उस समय से जनसंघ के साथ हैं जबसे देश में गैर कांग्रेसवाद लहर चली थी। 1967 के बाद जब गैर कांग्रेसवाद की राजनीति शुरू हुई तब इसके जनक लोहिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय रहे। हमारे बीच वैचारिक स्तर पर मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हम साथ रहे हैं।
आपने घोषणा पत्र की बात कही है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि नीतीश कुमार जी के व्यस्त रहने के कारण अभी तक हम अपना घोषणा पत्र जारी नहीं कर सके हैं। हमारा घोषणा पत्र तैयार है। जल्द ही हम इसे जनता के बीच लाएंगे। दूसरी बात जो आपने कही है धारा 370 और देशद्रोह संबंधी कानून की तो हम आपको बताना चाहते हैं कि इन सभी मुद्दों पर जदयू की अपनी राय है। हम भाजपा के इन एजेंडों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं।
इस बार के चुनाव में नीतीश जी को अपने बजाय नरेंद्र मोदी जी का चेहरा प्रस्तुत कर वोट मांगना पड़ रहा है? सृजन घोटाला, शेल्टर कांड आदि के कारण क्या नीतीश जी की सुशासन बाबू वाली छवि धूमिल हुई है?
केसी त्यागी: पहली बात तो यह कि यह लोकसभा का चुनाव है। नरेंद्र मोदी केवल भाजपा के नहीं पूरे एनडीए के नेता हैं। वे एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। हमलोगों ने उन्हें अपना नेता माना है। इसलिए यह कहना कि नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी जी के नाम पर वोट मांग रहे हैं, गलत है। आपने जो सृजन घोटाले या फिर दूसरे मामले की बात कही है, वह सरासर बेबुनियाद है। नीतीश कुमार जी पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकता है। सृजन घोटाले को लेकर उन्होंने सीबीआई जांच की पहल स्वयं की। विपक्ष आजाद है कोर्ट में जाकर सबूत दे।
जिस तरह से अभी तक चुनावी रैलियां हुई हैं, ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार ने खुद को साइड कैरेक्टर मान लिया है। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का मुद्दा जो कि उनका अपना था, इस बार उससे बचते नजर आ रहे हैं।
केसी त्यागी: बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले, यह हमारे दिल से जुड़ा हुआ सवाल है। यदि यह हो गया तो बिहार में औद्योगिक क्रांति होगी। 90 प्रतिशत रेवेन्यू बिहार को मिलेगा। वहीं उद्यमियों को भी इसका लाभ मिलेगा। आप देखिए न कि बिहार के विभाजन के बाद क्या हुआ। जितने भी संसाधन बिहार के पास थे, नहीं रहे। बदहाली, कंगाली और गुरबत बिहार के हिस्से में आयी। इसलिए हमारी पार्टी और बड़े जनमानस का मानना है कि जबतक बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा तबतक यहां से पलायन का सिलसिला नहीं केगा। हमलोगों ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। हम इस मांग को भूले नहीं हैं।