गया में लोकसभा का चुनाव प्रथम चरण में है और सभी प्रत्याशी वोटरों को लुभाने के लिए अलग -अलग तरीके अपना रहे हैं। इसी क्रम में आज भगवान को न मानने वाले बिहार के पूर्व सीएम सह NDA प्रत्याशी जीतन राम मांझी गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर पहुंचे। वहां जीतन राम मांझी ने विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के विष्णु चरण पर पुष्प अर्पित कर विशेष पूजा अर्चना की और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद जीतन राम मांझी ने कहा कि हम भारतीय संस्कृति के पुजारी हैं और भारतीय संस्कृति में आस्था सबसे बड़ी चीज होती है। उसी आस्था के तहत सभी जगह जाते हैं और आशीर्वाद लेते हैं। विष्णुपद मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है।
जब ताज कारिडोर तो विष्णुपद में कारिडोर क्यों नहीं
एनडीए प्रत्याशी पूर्व जीतन राम मांझी ने कहा कि जब ताज कॉरिडोर हो सकता है, बनारस कॉरिडोर हो सकता है तो विष्णुपद कॉरिडोर क्यों नहीं हो सकता है, वह भी होगा। यह हमारे मन में संकल्पित है। हमारे बारे में लोग पूजा के बारे में दूसरा अर्थ रखते है। जीतनराम मांझी ने विष्णु मंत्र का उच्चारण करते हुए कहा कि हम स्नान करते वक्त 5 से 6 मंत्र देवी देवताओं का पढ़ते हैं। हम अंदर से विश्वास रखते हैं और उसी विश्वास के कारण हम विष्णुपद आएं हैं। अच्छा काम और बड़ा काम करने के पीछे सबके आशीर्वाद की आवश्यकता होती है, इसलिए आशीर्वाद लेने आए है। गया और दक्षिणी बिहार के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उसके लिए हमे आशीर्वाद चाहिए। धर्म पर हमने कभी कुछ नहीं कहा सनातन धर्म हीं तो एक ऐसा धर्म है, जहां जात-पात की बात नही होती है। सनातन धर्म के बाद विकृतियां आई हैं। जैसे गंगा गंगोत्री से निकलकर हरिद्वार में उतरती है उसके बाद गंगा मैली हो जाती है। लेकिन हरिद्वार का पानी बहुत पवित्र होता है। उसी प्रकार से सनातन धर्म में शुरू से ही हमलोग पैदा हुए है। उस समय इधर उधर की कोई बात नही थी।
कुछ लोग विरोध करते हैं
जीतनराम मांझी ने कहा कि कालांतर में कुछ लोग कर दिए तो उनका विरोध कभी–कभी करते है।भगवान के बनाए हुए जीव जंतुओं को जो प्यार करता है, भगवान भी उसे प्यार करते है।यही कारण है सनातन धर्म में पशु, पहाड़, पेड़,जंगल की पूजा होती है। हम यह मानते है, लेकिन बहुत सारे लोग दिखावटी करते है। हम उनका विरोध करते है।अब तक जितने भी गया के सांसद बने, वह गया के लिए क्या सोचें है। लेकिन जीतन राम मांझी 9 महीना के लिए सीएम बना तो विष्णुधाम को राजकीय मेला घोषित किया। बैजू धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया।