बिहार के सहरसा जिले से मेहनत, लगन और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बिहरा थाना क्षेत्र के तुलसियाही गांव के एक साधारण परिवार के तीन सगे भाई-बहनों ने एक साथ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पास कर जिले का नाम पूरे देश में रोशन किया है। खास बात यह है कि तीनों ने कोटा या पटना जैसे बड़े शहरों में गए बिना, अपने गृह जिले में रहकर तैयारी की और शानदार सफलता हासिल की। बच्चों के पिता गांव में छोटी किराना दुकान चलाते हैं।
बड़े शहर नहीं गए, घर पर रहकर की तैयारी
तीनों भाई-बहनों ने सहरसा में रहकर स्थानीय कोचिंग और सेल्फ स्टडी के सहारे यह मुकाम हासिल किया। सबसे बड़े भाई रजनीश कुमार ने 633 अंक हासिल किए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 3122 और ओबीसी रैंक 1173 रही। उनका कुल परसेंटाइल 99.8425917 रहा। फिजिक्स में 99.84, केमिस्ट्री में 99.66 और बायोलॉजी में 97.86 परसेंटाइल मिले। यह उनका तीसरा प्रयास था।
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दूसरे नंबर पर बहन साक्षी कुमारी ने 601 अंक प्राप्त किए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 9762 और ओबीसी रैंक 4340 रही। उनका कुल परसेंटाइल 99.5092242 रहा। फिजिक्स में 99.82, केमिस्ट्री में 97.77 और बायोलॉजी में 96.60 परसेंटाइल मिले। यह उनका भी तीसरा प्रयास था।
सबसे छोटे भाई प्रहलाद कुमार ने पहले ही प्रयास में 565 अंक हासिल किए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 26751 और ओबीसी रैंक 12878 रही। उनका कुल परसेंटाइल 98.6615297 रहा। फिजिक्स में 99.44, केमिस्ट्री में 98.12 और बायोलॉजी में 90.41 परसेंटाइल मिले।
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा पढ़ाई का सपना
तीनों भाई-बहनों ने शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से की। रजनीश और साक्षी ने सीबीएसई बोर्ड से मैट्रिक और बिहार बोर्ड से इंटर किया, जबकि प्रहलाद ने मैट्रिक और इंटर दोनों बिहार बोर्ड से पास किए। बच्चों के पिता रोहित कुमार गांव में किराना दुकान चलाते हैं। सीमित आय होने के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। मां पूनम देवी ने कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि बच्चों की मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी।
भविष्य के सपने भी हैं बड़े
प्रहलाद कुमार ने कहा कि समय पर परीक्षा परिणाम जारी होने से छात्रों का भरोसा बढ़ता है। उनका सपना भविष्य में ऑर्थोपेडिक सर्जन बनकर लोगों की सेवा करना है। साक्षी कुमारी ने बताया कि उन्होंने कभी किसी बड़े शहर का रुख नहीं किया। सहरसा में रहकर स्थानीय प्रगति क्लासेज और सेल्फ स्टडी की मदद से यह सफलता हासिल की। वह आगे चलकर बाल रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हैं। रजनीश कुमार ने युवाओं को संदेश दिया कि आर्थिक स्थिति कभी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। अगर मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन हो तो छोटे शहर और गांव से भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
गांव में जश्न का माहौल
तीनों भाई-बहनों की सफलता के बाद पूरे तुलसियाही गांव में खुशी का माहौल है। गांव में मिठाइयां बांटी जा रही हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधि व शिक्षाविद परिवार को बधाई देने पहुंच रहे हैं। यह सफलता उन छात्रों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का हौसला रखते हैं।