बैठक में एसपी हिमांशु कीट वितरण करते हुए
अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अब सहरसा पुलिस पुराने तरीकों के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से काम करेगी। जवाहर विकास भवन में आयोजित मासिक अपराध गोष्ठी के दौरान पुलिस अधीक्षक हिमांशु ने इसके स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने जिले के सभी थानाध्यक्षों को पीओ (प्रिजर्वेशन ऑफ ऑब्जेक्ट्स) किट उपलब्ध कराते हुए कहा कि किसी भी मामले में क्राइम सीन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए एसपी हिमांशु ने कहा कि घटनास्थल में अपराध से जुड़े कई अहम रहस्य छिपे होते हैं। यदि साक्ष्य संकलन में जरा भी लापरवाही बरती गई तो अपराधी इसका लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी घटनास्थल से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित कर संकलित किया जाए।
'तकनीकी रूप से दक्ष होने की आवश्यकता'
एसपी ने अधिकारियों को नई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि अब सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की जांच अनिवार्य कर दी गई है। ऐसे मामलों में पुलिस को साक्ष्य संरक्षण के प्रति और अधिक संवेदनशील एवं तकनीकी रूप से दक्ष होने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी थानों को विशेष पीओ किट उपलब्ध कराई गई है, साथ ही उनके उपयोग को लेकर प्रशिक्षण भी दिया गया है।
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शीघ्र निष्पादन के निर्देश दिए
मासिक अपराध गोष्ठी में एसपी ने लंबित और पुराने मामलों की भी समीक्षा की तथा उनके शीघ्र निष्पादन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर अनुसंधान और समयबद्ध कार्रवाई से ही आम जनता का पुलिस पर विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
बैठक में मुख्यालय डीएसपी धीरेंद्र कुमार पांडे, डीएसपी कमलेश्वर प्रसाद सिंह, सदर एसडीपीओ आलोक कुमार तथा सिमरी बख्तियारपुर एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर समेत जिले के सभी थानाध्यक्ष उपस्थित रहे।
बैठक में एसपी हिमांशु कीट वितरण करते हुए
बैठक में एसपी हिमांशु कीट वितरण करते हुए