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Holi 2025: यहां सौ साल से हो रहा होलिका दहन, विधि विधान से पूजा के बाद होली की गीतों पर झूमते दिखे लोग

Fri, 14 Mar 2025 10:43 AM IST
कोसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधेपुरा

सार

होलिका जलाने के बाद लोगों ने कहा कि होली का पर्व न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह हमें समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की भी प्रेरणा देता है। इस परिसर में करीब 100 वर्षों से होलिका दहन का आयोजन होता है।
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मधेपुरा में होलिका दहन में शामिल लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित बांग्ला दुर्गा मंदिर परिसर में गुरुवार की रात 11 बजे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया। इस पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माने जाने वाले इस पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया। होलिका दहन से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन और धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। होलिका दहन की अग्नि प्रज्वलित होते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने अग्नि में नारियल, गेंहू की बालियां, गूलर के फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की।
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इस अवसर पर भक्तों में खासा का उत्साह देखा गया। लोगों ने अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं। लोग होली गीतों पर झूमते नजर आए। पूरा मंदिर परिसर रंग-बिरंगे गुलाल से सराबोर हो गया। माहौल प्रेम, सौहार्द व उमंग से भर गया।

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लोगों ने दिया एकता और भाईचारे का संदेश

स्थानीय नागरिकों ने इस अवसर पर एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि होली का पर्व न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह हमें समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने की भी प्रेरणा देता है। लोगों ने बताया कि बांग्ला दुर्गा मंदिर परिसर में करीब 100 वर्षों से होली का दहन का आयोजन होते आ रहा है।

 

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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए

इधर, कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में तैनात रहा, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। होलिका दहन के इस पावन अवसर पर पूरा शहर भक्तिमय हो गया और सभी ने रंगों के इस महापर्व का आनंद लिया। अब लोग रंगोत्सव यानी धुलंडी के लिए उत्साहित हैं।
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