सुपौल के त्रिवेणीगंज प्रखंड थाना अंतर्गत गोनहा पंचायत के पुरनदाहा वार्ड 15 में बुधवार को कब्रिस्तान की जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद गहरा गया। मामला इतना बढ़ गया कि दो समुदायों के लोग आमने-सामने हो गए। वही मौके पर पहुंचे त्रिवेणीगंज थानाध्यक्ष रामसेवक रावत को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल प्रशासन तत्काल हरकत में आया और पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप से हालात पर काबू पाया गया। फिलहाल मौके पर तनाव के मद्देनजर दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
पूर्व में भी हुआ था विवाद
ग्रामीणों के अनुसार, जमीन के जिस हिस्से पर विवाद हुआ, वहां कब्रिस्तान की एक एकड़ 73 डिसमिल जमीन है, जो गैर मजरुआ आम खास के रूप में दर्ज है। दावा है कि करीब 200 वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में इस जमीन का उपयोग होता रहा है। हालांकि पूर्व में भी कब्रिस्तान के रास्ते की जमीन को लेकर गांव में विवाद हुआ था। स्थानीय मो हमीद, मो अफजल, मो मुस्लिम, मो शमीर, मो पांचो आदि ने बताया कि करीब 06 माह पूर्व स्थानीय स्तर पर मुखिया सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कब्रिस्तान के लिए 10 फीट रास्ता निकाला गया था। आरोप है कि बुधवार को इसी जमीन को एक समुदाय विशेष के व्यक्ति तौफीक सरदार के परिजनों द्वारा जोत दिया गया। इस क्रम में कब्रिस्तान का भी कुछ हिस्सा जोता गया। हालांकि, इस बीच गांव के कुछ लोग मौके पर जुट गए और जोत रोकने को लेकर विवाद होने लगा। विवाद बढ़ता देख, जमीन जोत कर रहा पक्ष मौके से फरार हो गया। इस बीच ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती गई और विवाद की वजह से दो समुदाय आमने-सामने की स्थिति में आ गए। वही सूचना मिलते ही प्रशासन हालात नियंत्रित करने में जुट गई।
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स्थानीय स्तर पर निकाला गया था कब्रिस्तान के लिए रास्ता
ग्रामीणों का कहना है कि कब्रिस्तान जाने-आने में पहले काफी परेशानी होती थी। लिहाजा करीब 06 माह पूर्व पंचायत की पहल पर वर्तमान मुखिया अब्दुल मजीद, पूर्व मुखिया प्रतिनिधि सुबोध कुमार सहित अन्य स्थानीय गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में कब्रिस्तान तक पहुंचने हेतु 10 फीट चौड़ा रास्ता भी निकाला गया था। दावा है कि जिस पक्ष द्वारा जमीन की जोत की गई है, उसका कब्रिस्तान के आसपास कोई जमीन नहीं है। बावजूद अवैध तरीके से वह जमीन पर कब्जा जमाए हुए है।
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तीन घंटे बाद पहुंची पुलिस, थानेदार से उलझे ग्रामीण
बुधवार की सुबह से ही गोनहा में दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति थी। ग्रामीणों का आरोप है कि जोत शुरु होने के साथ ही पुलिस को सूचना हेतु कई बार कॉल किया गया। लेकिन करीब तीन घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक जमीन की जोत संपन्न हो चुकी थी। लिहाजा पुलिस के पहुंचते ही ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। त्रिवेणीगंज थानाध्यक्ष रामसेवक रावत से भी ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन की जोत को थानाध्यक्ष की मौन सहमति थी। इसके लिए रुपए का लेनदेन भी हुआ है। हालांकि इसको लेकर अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज करते रहे। बाद में एसडीएम अभिषेक और एसडीपीओ विपिन कुमार भी मौके पर पहुंचे। जहां दोनों अधिकारियों ने समझा-बुझा कर ग्रामीणों को शांत कराया।
गांव में अगले आदेश तक दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात
विवाद की गंभीरता को देखते हुए तत्काल दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति का आदेश निर्गत किया गया है। एसडीएम कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, भूमि पर शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी विजय कुमार नीलम और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राहुल कुमार को बतौर दंडाधिकारी नामित किया गया है। वही सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से त्रिवेणीगंज थाना को बल के साथ सतर्क रहने का निर्देश भी दिया गया है। एसडीएम और एसडीपीओ ने दोनों समुदायों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अराजकता या गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।