सहरसा सदर अस्पताल परिसर में शनिवार को 53 वर्षीय संत बौकू चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। मृतक के परिजनों ने हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं, क्योंकि न तो संत को अस्पताल में भर्ती किया गया और न ही उनकी मौत का कोई रिकॉर्ड अस्पताल रजिस्टर में दर्ज है।
सोशल मीडिया से मिली मौत की जानकारी
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल प्रबंधन ने बेहद अमानवीय व्यवहार किया। महादेव चौधरी ने कहा कि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि बौकू चौधरी को कौन और किस हालत में अस्पताल लेकर आया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल के किसी भी रजिस्टर में न तो भर्ती का उल्लेख है और न ही मृत्यु का। महादेव चौधरी ने सवाल उठाया कि अगर संत को चोट लगी थी, तो इलाज क्यों नहीं किया गया? और अगर भर्ती नहीं हुए, तो उनकी मौत अस्पताल परिसर में कैसे हो गई? परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि हत्या का मामला हो सकता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
6 नवंबर को गांव से निकले थे संत
परिजनों के मुताबिक बौकू चौधरी 6 नवंबर को मतदान के बाद अपने गांव से निकले थे और उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं था। शनिवार को अचानक उनकी मौत की खबर आने से पूरा परिवार सदमे में है।
पुलिस ने शव भेजा पोस्टमार्टम के लिए
मामले की जानकारी मिलते ही सहरसा सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। सब इंस्पेक्टर शोएब अख्तर ने बताया कि यह संदिग्ध मौत का मामला है। पुलिस ने परिजनों के बयान पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
सिविल सर्जन ने जांच का दिया आश्वासन