बिहार में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को सहरसा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने संस्कृत विद्यालयों को बंद किए जाने, मदरसों की जांच और राज्य में गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। यह बातें उन्होंने विकास भवन में आयोजित जिला बीस सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहीं।
बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में विकास योजनाओं, बाढ़ की तैयारियों और शिक्षा विभाग की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
राज्य में जल्द स्थापित होगा गुरुकुलम विद्यापीठ
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।उन्होंने बताया कि इसी दिशा में राज्य में गुरुकुलम विद्यापीठ की स्थापना की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए एक विशेष रणनीति तैयार की जा रही है और जल्द ही इस दिशा में आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
11 संस्कृत विद्यालय बंद करने पर दी सफाई
संस्कृत विद्यालयों को बंद किए जाने के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि राज्य में 11 संस्कृत विद्यालयों को बंद किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी शैक्षणिक संस्थान को कमजोर करना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और संसाधनयुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मदरसों की जांच पर सरकार का रुख स्पष्ट
मदरसों की जांच को लेकर उठ रहे सवालों पर भी शिक्षा मंत्री ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग चाहता है कि संस्कृत विद्यालयों और मदरसों दोनों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों और दोनों प्रकार के संस्थान समान रूप से आगे बढ़ें।मंत्री ने स्पष्ट किया कि मदरसों की जांच किसी पूर्वाग्रह या भेदभाव के आधार पर नहीं कराई जा रही है। इसका उद्देश्य केवल वहां उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों और वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन करना है।
उन्होंने कहा कि विभाग की जिम्मेदारी है कि वह धरातल पर संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन करे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं मिल सकें।
बाढ़ की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश
बैठक के दौरान संभावित बाढ़ की स्थिति को लेकर भी चर्चा की गई। शिक्षा मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपदा की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जानी चाहिए।
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तीन महीने बाद फिर होगी समीक्षा बैठक
मंत्री ने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णयों और विभिन्न योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए अगले तीन महीने बाद फिर से समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार विकास योजनाओं और शिक्षा सुधार कार्यक्रमों की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि तय समय सीमा में योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाया जा सके।