शहीद रामबाबू के घर के बाहर लगी भीड़।
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मां को नहीं दी बेटे की शहीद होने की सूचना
रामबाबू के चाचा शशिकांत पासवान ने जानकारी दी कि वे दो भाइयों में छोटे थे और स्नातक तक शिक्षित थे। बड़े भाई अखिलेश सिंह झारखंड के हजारीबाग में रेलवे में लोकोपायलट के पद पर कार्यरत हैं। चार महीने पहले ही रामबाबू का विवाह हुआ था। उनकी पत्नी इस हृदयविदारक सूचना से अनजान थीं और उन्हें केवल घायल होने की जानकारी देकर मंगलवार सुबह मायके धनबाद से गांव लाया गया। शहीद रामबाबू के पिता रामविचार प्रसाद, जो पूर्व उपमुखिया थे, का निधन दो वर्ष पूर्व हो चुका है। मां की तबीयत पहले से ही खराब है, जिस कारण उन्हें भी अब तक यह दुखद समाचार नहीं दिया गया है।
बुधवार दोपहर आएगा पार्थिव शरीर
शहीद की शहादत की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय प्रशासन हरकत में आया। अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार और एसडीपीओ अजय सिंह शहीद के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया। गांव में शहीद के अंतिम दर्शन की तैयारी शुरू हो चुकी है। पार्थिव शरीर बुधवार की दोपहर तीन से चार बजे तक गांव पहुंचने की संभावना है। शोक में डूबे गांव में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।