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नहीं चाहता था कि भाजपा से गठबंधन टूटे: शरद यादव

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जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव एक बार फिर मधेपुरा संसदीय क्षेत्र से किस्मत आजमा रहे हैं। लेकिन इस बार उनके लिए लडाई आसान नहीं। भाजपा से गठबंधन टूटने के कारण यहां का समीकरण उलझ गया है।
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इस क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल ने पप्पू यादव को मैदान में उतारा है, तो भाजपा ने जनता दल (यू) छोडकर भाजपा में गए विजय कुमार सिंह को टिकट दिया है।

बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी ने शरद यादव से मधेपुरा में मुलाकात की और उनसे कई अहम मुद्दों पर बात की।

आप अपने को कहां पाते हैं

मधेपुरा में आप अपने को कहां पाते हैं।

ये तो जनता से पूछिए। इस इलाके में कोसी में जो बाढ आई थी, हम उसके पुनर्निर्माण में लगे हैं। यहां के हालत पूछिएगा तो कोई प्रत्याशी ये नहीं बताएगा कि वो हार रहा है या जीत रहा है। ये मीडिया का काम है कि वो लोगों के बीच जाकर इस बात का पता लगाए और जो सच है उसको दिखाए।

चलिए ये सवाल मैं दूसरे तरीके से पूछ लेता हूं। मधेपुरा की जनता आपको वोट क्यों दे?

ये बात भी आप उनसे पूछेंगे तो वे बताएंगे आपको। देश में ये अकेला ऐसा इलाका है, जहां इतने काम हैं कि उनको गिना नहीं जा सकता। जैसे समंदर की लहरें गिनने में दिक्कत होती है। वोट है वो काम के लिए है। वोट इधर-उधर की बात के लिए नहीं है। जो काम को देखकर वोट करेगा, तो जनता ठीक रास्ते पर जाएगी। भाषण तो देश में ऐसे भीषण चल रहे हैं और वो कह रहे हैं कि हम ऐसा जादू की छडी घुमा देंगे कि बेकारी, बेरोजगारी, किसान, मजदूर, महिला- देश में कोई समस्याएं ही नहीं रहेंगी इनके आते ही।

शरद जी, एक तबका ऐसा है, जो भाजपा-जद यू गठबंधन टूटने से निराश है। इस पर आपको क्या कहना है?

हम नेशनल एजेंडे पर साथ थे। नेशनल एजेंडा विवादास्पद मुद्दों को अलग करके बनाया गया था। उन्होंने उस करार को तोड दिया। उनका घोषणापत्र हमारी बातों को साबित करता है। वो कश्मीर के मामले में लिख रहे हैं, वो समान आचार संहिता की बात कर रहे हैं। वे मंदिर मस्जिद को एक सीमा के अंदर बोल रहे हैं। लेकिन उनका मकसद तो वहां जबरिया मंदिर बनवाने का है। कोई घोषणापत्र सही साबित हुआ है इस देश में।

इंदिरा गांधी ने कहा था गरीबी हटेगी- हटी? इन्होंने कहा था चमकदार भारत- चमका? कांग्रेस ने कहा- आम आदमी का हाथ, कांग्रेस के साथ। तो आम आदमी की क्या दुर्गति हुई? अब ये नारे लगा रहे हैं, लेकिन इनकी सरकार रही नहीं है क्या। हमने सरकार में रहते हुए ये देखा है कि इन्होंने क्या किया है? इसलिए जो देश के लिए कुछ कदम उठते हैं, वो जोखिम भरे तो होते ही हैं।

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ आपके रिश्ते पहले जैसे हैं

तो आपको नुकसान हो सकता है?

नहीं हमको नुकसान नहीं होगा। हमको जनता जानती है। वो रंज कर सकती है, अफसोस कर सकती है, लेकिन हमको छोड नहीं सकती है।

एक बात ये भी कही जाती है कि जब गठबंधन टूटा तो आप उन शख्सियतों में से थे, जो इसके पक्ष में नहीं थे।

नहीं, मैंने बहुत कोशिश की थी कि बचे। मैंने दोनों पार्टियों से बात भी की। बात नहीं बनी। उन्होंने करार तोड दिया। बीजेपी के साथ तो कोई आना नहीं चाहता था, लेकिन हम सबको साथ लेकर आए।

करार टूटा। लेकिन सवाल तो ये उठाए जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के कारण ऐसा हुआ।

नहीं। ये गलत है। ये जो उनका घोषणापत्र आया है, वो हमारी बात को सही साबित करता है।

क्या भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ आपके रिश्ते पहले जैसे हैं?

मेरे तो रिश्ते सबके साथ हैं। हम अलग होने के बाद भी अपने रिश्ते बना कर रखते हैं। बीजेपी में भी कई नेता ये जानते थे कि हम जो बात कर रहे हैं, उसमें दम है। लेकिन वे बेबस हो गए। हमारी बात से सहमत थे वो। जिस तरह से पार्टी में फैसला हुआ, उससे वो भी आहत हैं। हमारे यहां भी लोग नहीं चाहते थे। खासकर हम नहीं चाहते थे।

आपको याद होगा एक समय  आडवाणी जी रथ यात्रा पर निकल गए थे। उस समय हमें बीजेपी का समर्थन बाहर से हासिल था। उस समय वीपी सिंह की सरकार थी। उन्होंने कहा कि हमें शिलान्यास करना है। उन्होंने कहा था कि शिलायन्स से पहले उन्हें छुआ तो वे समर्थन वापस ले लेंगे। दिल्ली में सब लोग नहीं चाहते थे कि आडवाणी जी को गिरफ्तार किया जाए। लेकिन हमने उन्हें रोक दिया और भारत की सरकार चली गई। जनता दल की सरकार को हमने दांव पर लगा दिया संविधान बचाने के लिए। अब देश में इतना झूठ का भ्रम रहता है कि सच को पहचानने में लोगों को वक्त लगता है।

नीतीश जी ने कहा था कि कांग्रेस विरोधी वोटों का लाभ उठाने की बारी आई, तो भाजपा ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला कर लिया।

फसल तो सबने तैयार की। जितने बीजेपी के सांसद थे, उतने ही क्षेत्रीय पार्टियों और सीपीआई और सीपीएम के एमपी थे। सब एक साथ लडते थे। 2-जी पर हो, कोल ब्लॉक हो, कॉमनवेल्थ हो- हम सभी मुद्दों पर एक साथ लडते थे। रेड्डी बंधुओं का मामला भी उठाना पडा और आज वे अंदर हैं। अब उनके दोस्त को इन्होंने टिकट दे दिया है। हम तो उसको छोडेंगे नहीं। हम तो चालीस साल से संसद में है।

चुनाव बाद अगर समीकरण बदले तो क्या हल्की सी भी संभावना है भाजपा के साथ जाने की।

हम एक प्रयास में लगे हैं।  कांग्रेस और भाजपा से बाहर सब लोग एक साथ हों। हम तीन मीटिंग कर चुके हैं। हमारा प्रयास यही है कि तीसरा मोर्चा पहला मोर्चा बन जाए। उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इधर-उधर की बातें नहीं करेंगे बल्कि लक्ष्य हासिल करेंगे। उसके बाद सोचने और समझने का सवाल ही नहीं उठता है।

लेकिन अगर समीकरण ऐसे बने कि भाजपा को समर्थन लेना पडे और नरेंद्र मोदी पीछे हट जाएं, तो। क्योंकि आप लोगों की शिकायत तो नरेंद्र मोदी को लेकर थी।

ये बात गलत है और उनका घोषणापत्र सामने आने के बाद चीजें और भी स्पष्ट हो गई हैं। एक मुद्दा नहीं था। जो आप पूछ रहे हैं वो काल्पनिक बात है। उन्होंने घोषणापत्र में जनसंघ वाले सभी पुराने मुद्दे डाल दिए हैं। इससे देश की एकता को चोट पहुंचेगी। हमारा प्रयास तो ये है कि तीसरा मोर्चा पहला मोर्चा बन जाए।

क्या आपकी लालूजी से बात होती है?

बिहार में कहा जा रहा है कि मुख्य मुकाबला भाजपा और राजद में है।

सतह पर जो चर्चा है, उस पर कभी न जाना। हमारी पार्टी तो इस देश की सबसे बडी पार्टी थी। गरीबों ने पिछले चालीस वर्षों से हमको नहीं छोडा तो अब क्या छोडेंगे। हमारे दौरे लगेंगे, तो उनकी गोलबंदी के आगे कोई टिकेगा नहीं।

प्रचार के दौरान ये तो स्पष्ट दिख रहा है व्यक्ति केंद्रित प्रचार हो रहा है। नीतीश, लालू प्रसाद, नरेंद्र मोदी। विकास की बातें हो नहीं रही है।

मुद्दे तब चलते हैं, जब नेता भी मुद्दे उठाए और उन मुद्दों को मीडिया भी गहराई से पकडें। हम तो कह ही रहे हैं।

लेकिन आपकी पार्टी भी भाजपा के घोषणापत्र पर तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है, लेकिन विकास पर कम ही करती है।

विकास तो लोगों को दिखता है, तब वो इसका अहसास करते हैं। हमने तो समावेशी विकास किया है। यहां एक जगह सडकें नहीं थी, हमने बना दी। जो बची हुई हैं, उसे भी बना देंगे हम हारे या जीते।

इस चुनाव में लालू प्रसाद यादव की वापसी की चर्चा हो रही है। बिहार की राजनीति में उनकी क्या जगह है?

इस पर बोलना ठीक नहीं है। आने वाले 16 मई को इसका फैसला हो जाएगा। सबका भविष्य खुल जाएगा। उसका इंतजार करना चाहिए।  लालूजी में और सब ठीक है, लेकिन काम के मामले में वो फाइल से भागते हैं।

क्या आपकी लालूजी से बात होती है।
मेरी सबसे बात होती है। लेकिन चुनाव के समय ये लोग मुझसे बात नहीं करते। खासकर यूपी और बिहार के लोग। जब संसद में होते हैं तो सबलोग साथ रहते हैं। लेकिन चुनाव के समय ये लोग समझते हैं कि उन्हें घाटा हो जाएगा।

मधेपुरा के लोगों की एक ये शिकायत है कि आप उन्हें समय नहीं देते।

बात सही है। लेकिन जितने भी सांसद रहे हैं, उनसे ज्यादा समय दिया है। मैं हर महीने आता हूं बिना नागा। जो लोग ऐसा कह रहे हैं, वो थोथा प्रचार कर रहे हैं। ये बातें विरोधी फैलाते हैं। इस देश में झूठ ज्यादा खाते हैं, सच को ज्यादा समय लगता है पचाने में।
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नीतीश कुमार के रिश्तों को लेकर काफी सवाल उठते हैं

अपने प्रतिद्वंद्वी पप्पू यादव के बारे में क्या कहेंगे।

मैं कभी भी अपने खिलाफ लडने वाले लोगों के बारे में नहीं बोलता। मैं जनता पर छोड देता हूं। वो सबसे बडा फैसला करती है। देश का गरीब आदमी ही सही रास्ता पकडता है। सच को वे भले ही देर से पकडता है, लेकिन ताकत से पकडता है। मैं इतना ही कहता चाहता हूं कि दोनों पार्टियों को अच्छा प्रत्याशी देना चाहिए था।

रेणु कुशवाहा पार्टी में क्यों बनी हुई हैं, जबकि वो अपने पति विजय कुमार सिंह के साथ भाजपा का मंच शेयर करती हैं?

जो पार्टी के खिलाफ काम करेगा, उस पर कार्रवाई करेगी। वो मामला पार्टी का है। वो पार्टी के लोग करेंगे।

आपके हिसाब से कौन बनेगा प्रधानमंत्री।

इस देश की जनता बनाएगी। 543 लोकसभा के मेंबर हैं। कोई भी मुर्गा घूरे पर खडा होकर बांग लगा रहा है कि मैं प्रधानमंत्री हूं। 543 की लोकसभा है। नदी के किनारे खडा होने के लिए 272 की संख्या होनी चाहिए। किसी को नहीं मिलने वाली। जिनके नाम चल रहे हैं, वो इस पद की प्रतिष्ठा को नीचे गिरा रहे हैं। इनका अता पता नहीं था, जब से मैं राजनीति में हूं। जय प्रकाश जी ने मुझे खडा किया था। ये तो नए-नए मुल्ले हैं, प्याज खा रहे हैं ज्यादा।

आपके और नीतीश कुमार के रिश्तों को लेकर काफी सवाल उठते हैं। आपके और नीतीश कुमार के बीच सब ठीक-ठाक है।

हमारी पार्टी देश की अकेली पार्टी है, जिस पर कोई आरोप नहीं लग सकता। भ्रष्टाचार का नहीं लग सकता। तो विरोधियों को और क्या मिलेगा। वो इसी तरह की अफवाह फैलाएंगे।

लेकिन शायद आप घोषणापत्र को लेकर खुश नहीं थे।

घोषणापत्र मेरे बगैर नहीं बनता। मेरे विचार से सब वाकिफ हैं। लोगों को कुछ मिल ही नहीं रहा है, तो वे क्या आरोप लगाएंगे। देश में जिन लोगों ने ईमानदारी से काम किया है, उनकी कहां चर्चा है। अंधेरों की चर्चा है, उजालों की चर्चा तो है नहीं। मुझ पर आज तक कोई आरोप नहीं लगा। एक आरोप लगा था हवाला में। सबने मना कर दिया, लेकिन मैंने कहा कि हमको दिया है। खेती से तो हम पार्टी चला नहीं रहे, हमारा धंधा नहीं है। हमारी इंडस्ट्री भी नहीं है। वो चंदा देगा हम ले लेंगे। हमने अपने लिए तो इस्तेमाल किया नहीं, पार्टी के लिए किया है। सब पर चार्जशीट हो गई, मेरा बयान आने के बाद। सब कहने लगे कि आपने क्या कर दिया। नरसिंह राव पीएम थे। वे कहने लगे कि लोग मुझे कहेंगे लेकिन कराया आपने। हम मंत्री नहीं बने। उस समय हम सबसे ज्यादा स्वीकार्य थे।

एक आरोप ये भी है पार्टी के अध्यक्ष आप हैं और कंट्रोल नीतीश जी के पास है।

कुर्सी पर जो बैठ गया, उसकी ज्यादा चर्चा होती है। मैं क्या करूं। उसका क्या इलाज है। मैं तो किसी सूबे में नहीं आया। इस पार्टी में किसी एक आदमी की चल ही नहीं सकती। जब तक मैं अध्यक्ष हूं किसी एक आदमी की चल ही नहीं सकती। अच्छी बात कहेगा तो क्यों नहीं मानेंगे।  नीतीश कुमार और मेरा वेबलेंग्थ एक है। नीतीश कुमार लोहिया के विचारों को जमीन पर उतार रहे हैं, तो क्यों उनको हम किसी तरह दिक्कत देंगे। हम तो उनका सहयोग करते हैं।

पिछली बार जब आप और भाजपा साथ थे, तो एनडीए को 32 सीटें मिली थी। अब आप अलग हैं, आपको कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है।

वो तो 16 मई को पता चलेगा। चुनाव के पहले अंदाजा करने वाले झूठे लोग होते हैं। इस देश में थैली लेकर सर्वे होते हैं। फैसला तो 16 मई को होगा।
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