फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'सीमांचल में तो फिर भी वोटकटवा ही हैं ओवैसी'

Thu, 22 Oct 2015 09:46 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिहार
विज्ञापन
विज्ञापन
बिहार के पिछड़े सीमांचल में अपनी सियासत की मजबूत नींव रखने की एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी की कोशिश परवान चढ़ती नहीं दिख रही।
विज्ञापन


इलाके की 37 की जगह महज 6 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने के बावजूद यहां उनकी हैसियत बमुश्किल वोट कटवा की ही है। किशनगंज के कोचाधामन को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर उनके उम्मीदवार लड़ाई को महज त्रिकोनात्मक ही बना पा रहे हैं।

ओवैसी का असर युवाओं और मौलवियों के एक खास वर्ग तक ही कायम है। हां, सियासी लड़ाई में एआईएमआईएम के कूद पड़ने से सीमांचल के मुसलमान बहुल इलाके में उत्तरप्रदेश का दादरी कांड सभी जगह चर्चा का विषय जरूर बन गया है।
विज्ञापन


उनके उम्मीदवारों को मतदाताओं से अल्पसंख्यक मतों में बंटवारे का आरोप झेलना पड़ रहा है। हालांकि सूबे में पार्टी का खाता खुलवाने के लिए खुद ओवैसी और उनकी हैदराबाद की टीम ने डेरा जरूर डाल दिया है।

ओवैसी ने कटिहार में बलरामपुर, किशनगंज में कोचाधामन और किशनगंज शहर, पूर्णिया में बायसी और अमौर तो अररिया में रानीगंज से एक दलित उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है।

खासबात यह है कि रानीगंज को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर मुसलमान मतदाताओं की आबादी 70 फीसदी के आसपास है।
विज्ञापन

6 सीटों पर लड़ ओवैसी कैसे करेंगे विकास?

कोचाधामन के उम्मीदवार और जदयू के विधायक रहे अख्तरुल ईमान लोकसभा चुनाव के दौरान किशनगंज सीट से बतौर जदयू प्रत्याशी नामांकन वापस लेकर चर्चा में रहे हैं।

सोंथा बाजार में शिक्षक कमरुद्दीन अंसारी कहते हैं-ऐसे समय में जब अल्पसंख्यक समुदाय भाजपा को हर हाल में सत्ता में आने से रोकना चाहता है, तब अचानक ओवैसी का आना शक पैदा करता है। वह जब तक इस शक को दूर करेंगे, तब तक चुनाव हो चुका होगा। हालांकि कजलामनी हाट के युवा ठेकेदार गुलाम सुभानी कहते हैं कि सभी दलों ने मुसलमानों को ठगा है, इसलिए इस बार एआईएमआईएम को मौका देंगे।

भट्टा हाट के तजाउल कहते हैं कि ओवैसी भाजपा सहित सभी दलों को सांप्रदायिक बता रहे हैं, मगर खुद छह सीटों पर ही लड़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें बताना चाहिए कि मुसलमान दूसरी सीटों पर किसे वोट देंगे।

बरबट्टा के शकील अहमद नाराजगी भरे स्वर में कहते हैं हमें पता है कि ओवैसी यहां क्यों और किसके इशारे पर आए हैं। अमौर में नवाजिस आलम, बलरामपुर में एडवोकेट आदिल, बायसी में गुलाम सरवर के खिलाफ अल्पसंख्यकों में ऐसी ही नाराजगी है।

बलरामपुर के तेलता स्टेशन पर दवा की दुकान चलाने वाले इश्तियाक कहते हैं महागठबंधन को कमजोर करने के लिए ओवैसी मैदान में हैं। उनका अल्पसंख्यक हितों से कोई लेना देना नहीं है।

इसी क्षेत्र के बैरगाछी गांव के हबीब का मानना है कि ओवैसी ने सीमांचल के पिछड़ा होने का जायज मुद्दा उठाया है, मगर 6 सीटों पर लड़ने वाले ओवैसी कैसे विकास करेंगे। अमौर और बायसी में भी मुसलमानों में कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया थी।

इलाके के जाने माने लोगों का कहना कि ओवैसी के उम्मीदवारों को अंत में अपना कद और प्रभाव ही काम आएगा। ओवैसी बहस तो करा सकते हैं, मगर उनके उम्मीदवारों को खुद ही वोट का इंतजाम करना होगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें