गया जिले में तीन वर्षीय पीयूष को खुले बोरवेल से सुरक्षित निकालने के बाद जिला प्रशासन ने सभी खुले बोरवेल और खतरनाक गड्ढों को तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इन आदेशों का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा है। बांके बाजार प्रखंड के जमुआरा कला गांव में पीएचईडी विभाग का करीब 30 फीट गहरा धंसा बोरिंग आज भी खुला पड़ा है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।
डीएम के निर्देश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
दो दिन पहले खुले बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय पीयूष को सात घंटे लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने संबंधित विभागों को सभी खुले बोरवेल और खतरनाक गड्ढों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमुआरा कला गांव में पीएचईडी विभाग द्वारा कराया गया धंसा बोरिंग अब भी खुला पड़ा है।
30 फीट धंसा बोरिंग बना खतरे का केंद्र
ग्रामीणों के अनुसार, पीएचईडी विभाग द्वारा कराए गए बोरिंग का लगभग 30 फीट हिस्सा धंस गया है। गड्ढा पूरी तरह खुला है और उसके आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। ऐसे में यह स्थान ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
ग्रामीण बोले- विभाग ने मुड़कर भी नहीं देखा
स्थानीय ग्रामीण रविन्द्र पासवान ने बताया कि बोरिंग का कार्य पूरा होने के बाद विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दोबारा गांव नहीं आए। धंसे हुए गड्ढे की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे प्रतिदिन इसी स्थान के आसपास खेलते हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
लापरवाही पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेता है। योजनाओं का उद्घाटन तो कर दिया जाता है, लेकिन उनकी निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि हाल की बोरवेल घटना से सबक लेने के बजाय संबंधित विभाग अब भी गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
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जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि धंसे हुए बोरिंग को तत्काल सुरक्षित कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी और मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है।