सार
ओडिशा सरकार की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना कर इसकी आध्यात्मिक गरिमा, स्वच्छता और व्यवस्थाओं की सराहना की। विजिटर रजिस्टर में उन्होंने इसे जीवन का अद्भुत अनुभव बताया।
ओडिशा सरकार की मुख्य सचिव अनु गर्ग
- फोटो : Amar Ujala
विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार की आध्यात्मिक गरिमा एक बार फिर देशभर के प्रशासनिक अधिकारियों को आकर्षित करती नजर आई। शनिवार को ओडिशा सरकार की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना की। उनके साथ भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग भी मौजूद रहे।
गर्मजोशी से हुआ स्वागत
महाबोधि मंदिर परिसर पहुंचने पर गया के जिला पदाधिकारी सह बीटीएमसी अध्यक्ष शशांक शुभंकर, मंदिर के केयरटेकर भिक्षु दीनानंद और वरीय भिक्षु डॉ. मनोज ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से खादा भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद मुख्य सचिव अनु गर्ग ने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना की और पवित्र बोधि वृक्ष के दर्शन किए। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष सूत्रपाठ भी कराया गया।
आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित हुईं अनु गर्ग
मंदिर भ्रमण के दौरान जिला पदाधिकारी ने अतिथियों को महाबोधि मंदिर की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। अनु गर्ग मंदिर परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और शांत वातावरण से बेहद प्रभावित दिखीं। उन्होंने कहा कि महाबोधि मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है और यहां आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाएं भी सराहनीय हैं।
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विजिटर रजिस्टर में लिखीं भावुक बातें
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने विजिटर रजिस्टर में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि यह उनके जीवन का एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने लिखा कि यहां की स्वच्छता, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है। साथ ही उन्होंने स्वयं को धन्य और विनम्र महसूस करने की बात कही।
स्मृति-चिह्न देकर किया गया सम्मानित
दौरे के समापन पर मंदिर प्रबंधन की ओर से मुख्य सचिव अनु गर्ग और भारत सरकार के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग को भगवान बुद्ध की प्रतिमा, पवित्र बोधि पत्ता का सत्यापित फ्रेम और विशेष पोर्टफोलियो स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, सौहार्द और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष माहौल देखने को मिला।