नेपाल में आई भीषण त्रासदी का असर अब भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हर साल सितंबर में पितृपक्ष मेला और इसके बाद शुरू होने वाले बौद्ध पर्यटन सीजन को लेकर यहां के होटल, ट्रैवल्स और अन्य व्यवसायी तैयारी में जुट जाते हैं। इस बार तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के प्रस्तावित आगमन से कारोबारियों को अच्छी आमद की उम्मीद थी, लेकिन नेपाल में आई तबाही ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं ने होटल बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
श्रद्धालुओं की संख्या जरूर घटेगी
ऑल इंडिया भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप ने कहा कि नेपाल में बेहद भीषण त्रासदी आई है और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत सरकार ने नेपाल की हर संभव मदद की है, जिससे राहत और बचाव कार्य को गति मिली है। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे की मदद करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे समय में सहयोग ही सबसे बड़ा सहारा है। प्रज्ञादीप ने कहा कि सितंबर में पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या कम रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि दलाई लामा बोधगया आते भी हैं तो नेपाल और तिब्बत से श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल होगा, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और संसाधनों की भारी कमी है।
होटल बुकिंग रद्द होने लगी
बोधगया होटल एसोसिएशन के महासचिव एवं होटल व्यवसायी सुदामा ने बताया कि नेपाल की त्रासदी का सीधा असर बोधगया के होटल कारोबार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान नेपाल से बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु आते हैं, जबकि दलाई लामा के आगमन के समय नेपाल और तिब्बत से बौद्ध अनुयायियों की भी अच्छी संख्या रहती है। उन्होंने बताया कि नेपाल के कई पर्यटकों ने पहले से कराई गई होटल बुकिंग रद्द कर दी है। कई लोगों ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य लापता हैं या इस आपदा में जान गंवा चुके हैं। ऐसे में उनके लिए यात्रा करना संभव नहीं है। सुदामा ने कहा कि दलाई लामा के आगमन से हर बार कारोबार को बड़ा सहारा मिलता है, लेकिन इस बार प्रभावित इलाकों से श्रद्धालुओं के नहीं आने की आशंका है, जिससे होटल व्यवसाय को भारी नुकसान होगा
(इनुपट- रंजन सिन्हा, गयाजी)